अरविन्द आई केयर :- एक संस्मरण

जब तक मैं यह लिखूंगा, तब तक जागृति यात्रा का आंठवा संस्करण ‘मंदिरों और कवियों के शहर’ मदुरई में अपने पड़ाव‘अरविंद आई हॉस्पिटल’ से निकल कर चेन्नई की ओर अग्रसर होगा ।

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मुझे २०१० में जगृति यात्रा के माध्यम से ‘अरविंद आई केयर’ से रूबरू होने का अवसर प्राप्त हुआ और फिर २०११ में  पुनः इंजन रूम क्लब (engine room club) के साथ मैं यहाँ आया । दोनों मौकों पर मुझे अरविंद आई केयर के संस्थापक डॉ. वेंकटस्वामी के बारे में जानने का अवसर मिला और यही मेरे लिए यात्रा में सबसे ज़्यादा प्रभावशाली अनुभव रहा । टालने योग्य अंधापन हमेशा से ही भारत की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं में मुख्य रूप से चिंता का विषय रहा है | भारत जैसी विकसित होते देश की सरकार के लिए भी अकेले इससे निपटना काफी नहीं है। इन सबको ध्यान में रखते हुए डॉ. वेंकटस्वामी ने एक ऐसे वैकल्पिक स्वास्थ्य प्रतिरूप की कल्पना की जो न कि केवल सरकार द्वारा चल रही मुहिमों का संपूरक हो अपितु आत्म-निर्भर भी हो । इसी को ध्यान में रखतेहुए  डॉ. वेंकटस्वामीने 1976 में 58 वर्ष कि उम्र में GOVEL ट्रस्ट एवं Aravind Eye Hospital की स्थापना की ।  (अस्पताल का नाम श्री अरबिंदो के नाम पर रखा गया ।) उनकी कहानी सारे बहानों को नष्ट कर देती है । उनका कथन “बुद्धिमत्ता एवं क्षमता होना ही काफी नहीं हैं, वे कुछ सुन्दर करने का एहसास भी होने चाहिए” मेरे लिए प्रेरणा स्त्रोत है।

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अरविंद आई केयर में कदम रखने मात्र  से ही एक ऐसा अनुभव प्राप्त  हुआ जिसको शब्दों में बयान करना मेरी कल्पना से परे हैं । यहाँ मुझे करुणा, सौहार्द, आभार, विनम्रता,  निष्ठा,  दूसरों  की  निःस्वार्थ सेवा,आध्यात्मिक चेतना और आधुनिक तकनीक का परस्पर सामंजस्य देखने को मिला। मेरे आस पास का सम्पूर्ण वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भर गया । नवचेतना का संचार हुआ। शायद दुनिया को देखने का मेरा नजरिया बदल चुका  था । वहाँ से जाते जाते मेरी नज़र एक चिट्ठी पर गई, जो एक उपचार के लिए आए रोगी ने लिखी थी :-

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                                                                                               – मयंक जैन (पूर्व यात्री)