नारेबाज़ी से देश नहीं बदलता : शंशाक मणि

‘यार कुछ नया करते हैं’, ‘मैं अपनी ये नाइन टू फ़ाइव की जॉब से बोर हो गया हूँ’, ‘कुछ अलग करना है यार’, ‘भाड़ में गई नौकरी’, ‘अब तो अपना ख़ुद का कुछ करके ही रहूँगा’। आजकल ये वाक्य युवाओं के बीच आमतौर पर सुनने को मिल जाते हैं। ऐसे ही कुछ विचारों से प्रेरित होकर देश के लगभग 34 राज्यों (केन्द्र-शासित राज्यों सहित) से आये यात्रियों ने जागृति यात्रा 2015 के पहले पड़ाव में प्रवेश किया ।

पर्दा उठ चुका है और यात्रा के हर पड़ाव में ढेर सारे नये अनुभवों और अनापेक्षित परिस्थितियों से इन यात्रियों का सामना होगा । आरम्भिक-सत्र में इन चुनौतियों का सामना करने के लिए ज़रूरी मंत्रों और सही दृष्टिकोणों से यात्रियों को रूबरू कराने का प्रयास किया गया ।

शंशाक मणि त्रिपाठी, चेयरमेन, जागृति-यात्रा  यात्रियों से संवाद करते हुये कहते हैं – “देश में समस्याओं की कमी नहीं है लेकिन शोर मचाने से कुछ नहीं होने वाला। आपको समस्याओं की शिकायतें करने के बजाय समस्या समाधान पर ज़ोर देना चाहिये, क्योंकि नारेबाज़ी से देश नहीं बदलता । यदि आप इस विचारधारा को नहीं अपना पाते तो आप यात्रा से सीख पाने में सफल नहीं हो पायेंगे।”

शंशाक मणि, चेयरमेन, जागृति
शंशाक मणि, चेयरमेन, जागृति

आज का युवा कुछ ऐसा करना चाहता है जो उसके दिल के क़रीब हो, जहाँ वो बॉस की नहीं बल्कि उस काम की गुलामी करना पसन्द करता है जिसे उसने ख़ुद चुना हो और हो भी क्यूँ ना आख़िर वर्तमान

समय के युवाओं के पास संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। वो अपना मालिक भी ख़ुद बनना चाहता है और अपने विचारों का वाहक भी। अपने विचारों को ज़मीनी हक़ीकत में बदलने का माद्दा भी रखता है और इंटरनेट तथा सोशल मीडिया के निरन्तर विकास ने उसे नई सूचनाओं और तकनीकों से लैस करने का काम भी किया है।

कुछ नया करने की ये चाहत और जुनून आजकल युवाओं के बीच अंग्रेज़ी के शब्द ‘स्टार्टअप’ के रूप में फलीभूत होती दिखाई पड़ रही है। ‘स्टार्टअप’ यानि कि अपने लघु उद्यम की शुरूआत करना और यही लघु उद्यम भविष्य में ‘आंत्रप्रन्योर’ यानि कि उद्यमियों को जन्म देता है । किसी भी देश के आर्थिक विकास में वहां के औद्योगिक विकास की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण होती है और औद्योगिक विकास की गति को तीव्र करने के लिए परम्परागत रूप से चली आ रही अर्थव्यवस्था के अवरोधों को समाप्त करके देश के विकास को नई दिशा प्रदान करना भी उतना ही आवश्यक है। इसी कड़ी में ‘स्टार्टअप’ उस नींव की ईंट की तरह काम कर रहा है जिस पर देश के भविष्य की इमारत को मज़बूती से खड़ा किया जा सके । ‘उद्यम द्वारा राष्ट्र-निर्माण’ के इसी विचार को लेकर देश के विभिन्न क्षेत्रों से आये लगभग 450 यात्रियों और लगभग 75 समन्वयकों के साथ जागृति यात्रा 2015 का सफ़र शुरू हो चुका है ।