जागृति एंटरप्राइज़ मेला (जे. ई. एम.), बेंगलुरु

जागृति यात्रा 27 दिसंबर, 2016 को बेंगलुरु शहर पहुँची । यहाँ माउंट कारमेल कॉलेज के सभागार मे 500 युवा उद्यमी यात्रियों के साथ दो आदर्शों ने अपनी उद्यम यात्रा को साझा किया एवं उनके प्रश्नों का जवाब दिया । ये दोनों आदर्श सामाजिक पहलों से सुप्रभाव स्थापित करने मे सफ़ल रहे है । ‘श्रीमती हेमलता अन्नमलाई’ एवं ‘श्री ओसामा मंज़र’ ने बिल्कुल ही निराले अन्दाज़ों मे अपनी कहानियों को साझा किया । हेमलता जी ने ‘दृढ संकल्प के साथ कडी मेहनत,कभी हार न मानने की शक्ति को उद्यम के लिए काफ़ी ज़रूरी बताया । शायद इसी की वजह से उनके ‘एंपीयर’ नाम की संस्था ने ग्रामीण महिलाओं को विद्युत चालित वाहनों को सस्ते दामों मे उपलब्ध करा कर एक स्थिर संस्था का निर्माण किया है । उन्होने ‘योग’ के जरिए युवाओं को स्वस्थ रहने का संदेश दिया, तथा अनुशासित जीवन से भारत मे तकनीक के द्वारा आम आदमी के जीवन मे बदलाव लाने की प्रेरणा दी । महिलाओं को उन्होने एक बेहतर उद्यमी बताया अगर वो अपनी निर्णय शक्ति को आज़ाद रख सके तो ।

‘डिजिटल एम्पावर्मेंट फ़ाउंडेशन’ के ओसामा मंज़र ने पंचायतों एवं सामाजिक संस्थाओं को सूचना क्रांति से जोडने की ज़रूरत बताई । उन्होने अपनी रोचक जीवनी से एक उद्यमी के जोखिम लेने की प्रवृत्ति के कई उदाहरण बताए । साथ ही उन्होने अपनी संस्कृति, विरासत, भाषा, ज्ञान और जो पिरामिड के आधार मे रहने वाले लोग है उनका आदर करने की प्रेरणा दी ।

दोनों आदर्शों से मुलाकात के बाद यात्रियों ने ‘जागृति एंटर प्राइज मेला’ मे भाग लेने वाले नवीन उद्यमियों की प्रदर्शनियों को देखा । मेला इन कार्यक्षेत्रों से संबंधित रहा –

कृषि
शिक्षा
ऊर्जा
स्वास्थ्य
विनिर्माण
जल और स्वच्छता
कला, संस्कृति एवं खेल
प्रोद्योगिकी, वित्त एवं व्यापार सेवाएँ

करीबन पचास नवीन उद्यमों ने इस मेले मे प्रदर्शनी लगाई ।

मेले मे ही ‘संकल्प सामाजिक विकास संस्था’ ने ‘बोर वेल रिचार्ज’ के क्षेत्र मे अपने कार्यों की प्रदर्शनी लगाई । इसके संस्थापक ‘ श्री सिकंदर मीरानायक’ ने अपने गाँव ‘कोटुमचगी, कर्नाटक’ मे पानी की कमी की समस्या को देखते हुए 2008 मे ही इस संस्थान की शुरुआत की । उन्होने बताया कि किसानों को किफ़ायती तरीके से जल की उप्लब्धता कराने मे उन्हें काफ़ी हर्ष की अनुभूति होती है । एक नया ‘बोर वेल’ बनाने मे पानी की किल्लत के साथ साथ खर्च भी अधिक होता है ।

इसी प्रकार ‘लेट्स एन्डोर्स’ ने कई सामाजिक सन्स्थाओं को एक डिजिटल मंच दिया है जिससे वो अपने कार्यों के सुप्रभाव का सफ़ल प्रदर्शन कर ज़रूरी सन्साधनों को पाने के लिए इस मंच पर सहयोगियों से मदद पा सकते है ।

‘बज्ज इंडिया’ नाम की सामाजिक संस्था गाँवों मे एक प्रशिक्षण बस चलाती है, जिसके द्वारा वो महिलाओं के जीवन मे काफ़ी परिवर्तन ला पाई है । उन्हें वित्तीय अव्यवस्था, व्यापार के हुनरों मे कमी, सूचना के अभाव जैसे समस्याओं का सामना करना पडता था- पर ‘बज्ज इंडिया’ ने जागरुकता एवं प्रशिक्षण अभियानों से काफ़ी हद तक इन्हें दूर किया है ।

‘डेली डंप’ की संस्थापिका ने कचडे को ‘डिजाइन थिंकिंग’ से मूल्यवान बनाया, साथ ही कहा की कुछ क्षेत्रों मे समय और समर्पण से ही आप कुछ हासिल कर पाते है ।

कुछ और नवीन उद्यम जिन्होने मेले मे ‘वर्चुअल रीएल्टी’ से लेकर ‘शौच स्वछ्ता’ तक समस्याओं और नवीन समाधानों के हर बिंदु को छुआ । साथ ही श्नाइडर एलेक्ट्रिक, एंपीयर एवं डिजिटल एम्पावर्मेंट फ़ाउंडेशन’ की प्रदर्शनियां तो थी ही ।

इस मेले से यात्रियों को कई नवीन विचारों और उनके सफ़ल क्रियान्वयन का एक जीवंत खाका मिला है । उनके सपने, विचारों और ऊर्जा भरे ख्यालों को अंत मे ‘योर्स ट्रूली थिएटर्स’ ने एक छोटे से कार्यक्रम की प्रस्तुति कर और जवां कर दिया ।

यात्री गीत पर झूमते हुए सभी यात्री ‘उद्यम से भारत निर्माण” के संदेश को अगले पडाव पर ले जाने के लिए पुनः रेल की यात्रा को रवाना हुए ।