जागृति यात्रा: लाइफ़ लाइन एक्सर्साइज

जागृति यात्रा के पहले ही दिन – यात्रियों को एक अनोखी प्रक्रिया से गुजारा गया । इसका नाम ‘लाइफ़ लाइन एक्सर्साइज’ है जो अभी भी जारी है । इसके तहत सभी यात्री अलग-अलग समूहों मे अपने जीवन के अब तक के सभी अनुभवों को सन्क्षिप्त और कभी-कभी विस्तार मे अन्य यात्रियों से साझा करते है । जैसे – जैसे वो अपने जीवन के घटनाओं का वर्णन करते है, वैसे – वैसे ही वो अपनी जीवन रेखा के उतार-चढावों को रेखांकित कर प्रत्यक्ष रोमांच कायम रखते है |

इस प्रक्रिया मे कई यात्री एक दूसरे से घुल-मिल कर एक- दूसरे के प्रति समझ विकसित कर पाते है । उदाहरण-स्वरूप, एक यात्री ने अपने जीवन के उस वक्त का वर्णन किया जब वो अपने जीवन को ही समाप्त करने की सोच पडे थे । खैर, उन्होने ऐसा नही किया और उसके बाद ही उनका चयन ‘वर्ल्ड इकोनोमिक फ़ोरम’ मे हुआ । इससे श्रोता यात्रियों मे कभी हार न मानने के महत्व को समझा ।

एक और युवती ने बताया कि कैसे उन्होने पहली बार अकेले यात्रा की है क्योंकि उनके माता-पिता ने उन्हें लडकी होने के कारण काफ़ी बंदिशों के माहौल मे रखा |फिर भी यात्रा के इस अवसर के लिए उन्होने खुद के निर्णय को सर्वोपरि रखा । उन्होने बताया की उन्हें साहित्य मे रुचि थी, किन्तु फिर भी अन्य लोगों के नज़रिये से प्रभावित हो कर उन्होने ‘वाणिज्य’ की पढाई की| उन्होने काफ़ी खुलकर कुछ शारीरिक रोगों के अनुभवों को भी साझा किया |

ऐसी शिक्षा शायद ही कही मिल पाएं जो यात्रियों को इन वास्तविक जीवन की सच्चाइयों से अनुभव कराता है । साथ ही इस प्रक्रिया ने सभी यात्रियों को विनम्र होने का एक मौका दिया है, क्योंकि बहुत सारे यात्रियों की ज़ीवनी काफ़ी प्रेरित करने वाली रही है । कुछ ने तो सफ़ल उद्यमों की स्थापना कर डाली है और कईयों ने सफ़ल आरामदायक जीवन का परित्याग कर छोटे स्तर पर ही सामजिक पहल कर अन्य लोगों के जीवन की समस्याओं को दूर करने की ठानी है ।

पूरे भारत से, सभी राज्यों से एवं 23 अन्य देशों से आए यात्री न जाने कितने अलग-अलग भाषाओं, कहानियों को साझा कर रहे है | रेल अभी भी भारत के खेतों, पठारों से होकर गुजर रही है | काफ़ी रोमांचक अनुभव है | यात्रा जारी है …