जागृति यात्रा प्रस्तुत करता है – बिज़ ज्ञान ट्री

बिना प्रतिस्पर्धा के उद्यमी होने का क्या ही मज़ा ? उद्यमी तो हमेशा उस अंतिम मील का लक्ष्य पाने के लिए प्रोत्साहित कदमों के साथ बढ़ता ही जाता है | उसकी प्रेरणा का स्रोत हमें अक्सर दिखाई नही दे पाता |
 
अगर ऐसा है तो फिर एक उद्यमी यात्रा जिसमे ५०० से भी अधिक ऊर्जा से परिपूर्ण युवा उद्यमी या भावी उद्यमी एक रेल मे सफ़र कर रहें हों तो माहौल अपने आप ही प्रतिस्पर्धा से भर जाता है |
 
 बी. जी. टी. एक कार्यशाला जैसे  प्रतिस्पर्धा भरे माहौल मे प्रतिभागियों के लिए ग्रामीण परिवेश मे स्थानीय लोगों से विचार-विमर्श करवाती है | इसमे स्थानीय विशेषग्यो की सहभागिता से यात्री उनके सामाजिक एवं व्यापारिक ज़रूरतों को समझ पाते हैं | तत्पश्चात् संबंधित प्रतिभागी सात कार्यक्षेत्रों मे जिनमे – 
 
कृषि 
शिक्षा
ऊर्जा
स्वास्थ्य
जल
विनिर्माण, और 
कला 
 
आते हैं, व्यापार योजना बनाते हैं एवं विचारों का सृजन और मंथन करते है | ये सात कार्यक्षत्र के तीन आयामों – जिनमे वित्त, मोबाइल और सूचना प्रौद्योगिकी तथा सरकारी निजी कंपनी भागीदारी आते हैं – इन पर प्रमुखता से ध्यान दिया जाता है |
 
बी. जी. टी. की प्रक्रिया दो चरणों मे पूरी की जाती है |
 
– रेल मे यात्रा के दौरान
– यात्रा के पश्चात निवासीय कार्यक्रम 
 
छह से सात लोगों का एक दल तकनीक और वित्तीय दृष्टि से व्यापार-योजना पर मंथन करते है |
 
रेल मे ऐसे सभी दल अपनी-अपनी योजनाओं की प्रस्तुति करते है | ऐसा बरपार, देवरिया के पड़ाव पर संभव हो पाता है क्यूंकी वहाँ पर इस प्रक्रिया के लिए समुचित संसाधन उपलब्ध कराए जाते है | (इन संसाधनों को जान बूझकर सीमित रखा जाता है ताकि यात्री संसाधन की बचत और उनके अधिकांश प्रयोग
 के तरीकों को समझ सकें ) | व्यापार की रणनीति को हर दृष्टिकोण से माप लिया जाता है |
 
हर योजना की उत्कृष्ता का आकलन किया जाता है और जो भी श्रेष्ठतम हैं उन्हें दूसरे चरण के लिए चुना जाता है | देवरिया मे इन विजेताओं को योजनाओं के कार्यान्वयन मे सहयता प्रदान की जाती है | 
 
२०१७ की यात्रा मे तो इस कार्यशाला का सभी को बेसब्री से इंतज़ार है |