Andhere se Ujaale ki Or

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चौबीस की नशीली रात और पाँच सौ के काफ़िले के साथ,
ज़हन में जुनून और मन मे उमंग लिए निकले हम थामे हाथों में हाथ
मंज़िलें थी अनेक पर देश बाहें खोल लगाए बैठा था आस,
इसलिये देश से जोड़ दिये हमने अपने जज़्बात,
जागृति रेल में होकर सवार शुरू की भारत बदलने की बात ||
कोई था दिल्ली से, कोई पुणे से, यात्री थे हर कोने से,
ना भेष ना भाषा बाँधे इनको; बँधे थे बस अपने सपनों से
सबने हाथ मिलाया और किया जागृति गीत का गुणगान,
जीत का ज़ज्बा लिए दिलो में; आरम्भ हुआ हमारा अभियान ॥
हुबली में किया नन्हें सितारों की वाद्य संगीत प्रतिभा ने दंग,
और सीखे हमने सूर्य ऊर्जा व्यवसाय के भेद सेलको के संग,
बेंगलुरु की ‘हॉट कॉफी’ और इन्फोसिस परिसर की हुई टोली दीवानी,
पर उससे भी प्रेरणादायक निकली माइंड ट्री की उद्यम कहानी ॥
मदुरई में अरविन्द नेत्र चिकित्सालय देख भर आये आंसू आँखों में,
सामाजिक और व्यवसायिक सफलता के ऐसे उदाहरण मिले लाखों में,
चेन्नई में मुसाफ़िर पहुंचे रॉयल एन्फील्ड निर्माणशाला,
हज़ारो को रोज़गार देती उदयमिता की थी वो उत्तम पाठशाला ॥
विशाखापट्टनम था अगला पड़ाव जहाँ ‘अक्षयपात्र’ संस्था से हपरिवार,चय,
लाखों बच्चों की क्षुधा शांत कर, पायी जिसने क्रूरता रुपी असुर पर विजय,
काफ़िले ने की कूच गंजम में स्थापित ग्राम विकास की ओर,
जहाँ हमने सीखा थामना और थमाना ग्रामीणों को स्वच्छता और उन्नति की डोर ॥
पल भर में मुसाफ़िर पहुंचे नालंदा विश्वविद्यालय, जहाँ हुए हम अंतरध्यान,
और प्राचीन भारत की विद्वता और गौरव को किया हमने शत् – शत् प्रणाम,
देवरिया था अगला गाँव, जहाँ फैले थे गन्ने और सरसों के खलिहान,
यहीं ठहर कर हम सबने सोचा मध्य भारत की समस्याओं का समाधान ॥
दिल वालों की दिल्ली में अगली रात गूँज उठी अंशु की चीतकार,
उन चंद लम्हों ने ज़हन झकझोरा और मन में खड़ किये सवाल हज़ार ।
अगले ही दिन तिलोनिया में बंकर रॉय की बारी थी
जहाँ दादी और नानी की सौर इंजीनियरिंग देख कर जनता हतप्रभ सारी थी ॥
साबरमती आश्रम था अब अंतिम और यात्रा का पड़ाव सर्वश्रेष्ठ,
गांधी जी के आदर्शों से हमने सीखी प्यार की परिभाषा और त्यागना द्वेष,
आख़िरी चरण में जब प्रण लेके गाया हमने जागृति- गीत,
हाथों में हाथ थामे दिल में महसूस हुई इस यात्रा की जीत ॥
आये थे कुछ अनजान मुसाफ़िर ; अब जायेंगे बनके एक विशाल परिवार,
दिल की चिंगारी को शोला बनाकर उठायेंगे कंधों पर देश का भार,
ख़ुशी, हताशा क्रोध हो चाहे; चाहे हो भ्रष्टाचार की काली रात,
निडर होकर आओ शुरू करें कुछ यूँ ही देश बदलने की बात ॥
जय हिन्द !!

तापस मनी श्याम, JY’14