संभावनाओं की यात्रा

किसी यात्रा के लिए आप ज़्यादा से ज़्यादा क्या तैयारी करते है ? कपड़े, खाने-पीने की चीज़ें, जहाँ आप घूमने जा रहे हैं, उस जगह पर मिलने वाली ख़ास ख़रीदारी की सूची वग़ैरह-वग़ैरह,लेकिन अग़र कोई आपको ऐसी यात्रा पर आने का मौक़ा दे जहां आप ख़ुद को जान सकें, पहचान सकें, जहां आप करते हैं अपने भीतर अपनी ही  तलाश। ऐसी ही यात्रा है – जागृति सेवा संस्थान द्वारा आयोजित ८००० किमी. की एक ऐसी रेल यात्रा जो आपको मध्य भारत के दर्शन कराती है। इस बार १५ दिनों की इस यात्रा का हिस्सा बने हैं एक विशेष चयन-प्रक्रिया के माध्यम से भारत के विभिन्न राज्यों से आये लगभग ४५० यात्री जो देश के विकास का जज़्बा रखते हैं ।

देश के कोने-कोने से आये ये यात्री मन में नई उमंग और जोश भर कर आईआईटी मुम्बई परिसर में आज इकट्ठे हुये हैं। सुबह की पहली किरण के साथ ही इन यात्रियों के मन में भी ऊर्जा की लहर दौड़ गई और मन में सुनहरे सपने सजाये भारत की युवा शक्ति इस यात्रा में बढ़ने के लिये लालायित दिख रही हैं । किसी के चेहरे पर मुस्कान है,किसी के चेहरे पर विचारशीलता के भाव, कुछ के मन में नये दोस्त बनाने की चाहत तो वहीं कुछ के चेहरों पर जिज्ञासा के भाव भी दिखाई दे रहे हैं । विविधता में एकता की ख़ुशबू को इन यात्रियों के बीच सहजता से अनुभव किया जा सकता है । एक-दूसरे के क्षेत्र और संस्कृति से भिन्न होते हुये भी ये नवागन्तुक यात्री अपने रिश्तों को मज़बूत बनाने की नींव रख रहे हैं ।

सुबह 8 बजे आईआईटी कॉनवोकेशन हॉल से  सामान जमा करने से  शुरू होकर  पंजीकरण  प्रक्रिया के दौरान नये दोस्त बनाने का सिलसिला जारी है । जिन यात्रियों का पंजीकरण पूरा हो चुका था ,उन्हें लेक्चर हॉल के पास  बनी खुली जगह में जमावड़ा बनाकर कुछ खेल खेलते देखा गया । आते ही सीखने-सिखाने और विचारों के आदान-प्रदान की श्रृंखला शुरू हो चुकी है।

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मुम्बई से आये अनमोल, चेन्नई से आई यात्री शुभ श्री और भोपाल से आई वेदिका यात्रा के पंजीकरण के दौरान ही नये दोस्त बने हैं । शुभ श्री कहती हैं कि वो बिना किसी उम्मीद के खुले दिमाग़ से इस यात्रा का हिस्सा बनना चाहती हैं और उद्यम के नये तरीकों की खोज करना चाहती हैं । वो फोटोग्राफी से जुड़ा व्यवसाय शुरू करने की इच्छुक हैं  और हंसते हुये कहती हैं कि पैसे बनाने की इच्छुक हैं और पैसे बनाना उनका शौक़ है ।

इसी समूह में मुम्बई से आये अनमोल कहते हैं कि इस यात्रा पर स्वयं को नये जन्मे शिशु के तौर पर अनुभव कर रहे हैं जो दुनिया देखना चाहता है । सी ए की पढ़ाई ख़त्म कर चुके अनमोल हर तरह के उद्यम के विषय में जानने के इच्छुक हैं ताकि अपनी समझ को विस्तार दे सकें ।

भोपाल एन आई आई टी की वेदिका के इस यात्रा में शामिल होने की ख़ास वजह नेटवर्किंग है । वो ज़्यादा से ज़्यादा लोगों से जुड़ना चाहती हैं और सामाजिक उद्यम के क्षेत्र में उतरने की इच्छुक हैं ।

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कुल मिलाकर देखा जाये तो इन यात्रियों के मन में भरपूर उत्साह है । आज शाम एक ऐतिहासिक यात्रा का आरम्भ होने जा रहा है जब सैकड़ों युवाओं को आने वाले दिनों में अपने सपनों की मंज़िल मिलेगी और नये विचारों से उनका सामना होगा । हिन्दी का एक शेर जो राहुल सांस्कृत्यायन जैसे महान यात्रा लेखक के लिए प्रेरणास्त्रोत रहा है, वही शेर इन यात्रियों की स्थिति पर भी अनुकूल बैठता है-

सैर कर दुनिया की ग़ाफिल ज़िन्दगानी फिर कहां,

ज़िन्दगानी फिर रही तो नौजवानी फिर कहाँ ।।

ये यात्रा संभावनाओं की यात्रा है, उन्नति की यात्रा है, विकास और उद्यम की यात्रा है । इस यात्रा के मुसाफ़िर बनने वाले सभी प्रतिभागी अत्यंत हर्षित एवं गर्वित अनुभव कर रहे हैं ।