जागृति यात्रा- एक यादगार सफ़र…

आदित्य पाटनी, यात्री- 2015
आदित्य पाटनी, यात्री- 2015

एक सुखद सफ़र अंतहीन यादों का, अनगिनत हसीन पलों का, जो जीवन भर हमारे साथ रहेंगे। उद्यमिता के द्वारा भारत निर्माण 475 यात्रियों के साथ रेल के सफ़र में जिसकी शुरुआत 24 दिसम्बर को रात 12 बजे सपनों के शहर मुम्बई से हुई। नया जोश, नई उमंग, अनजाने साथी पर सभी एक ही लक्ष्य को पाने के लिए दृढ़ संकल्प। गांधी जी के सिद्धांतों पर आधारित जागृति यात्रा हमारे राष्ट्र को जानने की, पहचानने की और सबसे अहम हमारे भारत वासियों द्वारा किये गए राष्ट्र निर्माण के अतुल्य कार्यों को जानने की और उनसे आगे बढ़ने की सीख की।

जीवन का अनूठा अनुभव भारतीय रेल के 18 डब्बों की रेल हमारा घर बन गया। खाना-पीना, गाना-बजाना, मौज-मस्ती, यारी-दोस्ती और भी बहुत कुछ। दोस्ती भी ऐसी मानो बचपन से ही साथ है।जहाँ हर यात्री एक प्रेरणा स्रोत है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कला, शिक्षा, साहित्य, चिकित्सा आदि अनेक क्षेत्रों से विविधता वाले सह यात्री। कोई कश्मीर से तो कोई कन्याकुमारी से  कोई कच्छ से तो कोई सिल्लीगुड़ी से। पर विविधता में एकता मध्य भारत में उद्यमिता का विकास। ग्राम विकास, कलकेरी संगीत विद्यालय, अरविन्द आई केयर, अक्षय पात्रा जैसे राष्ट्र निर्माण के कार्य हमारे लिए सीख है कि अगर कुछ करने की चाह है तो हर मंज़िल आसान है। कोई भी कार्य छोटा नहीं है, नीवं जितनी मजबूत होगी ऊपर बनने वाला मकान उतना ही मज़बूत होगा।

2015 की वो आख़िरी शाम, ओडिशा के गंजम ज़िले का गुमनाम आदिवासी गाँव, स्कूली बच्चों के साथ नाच-गाना, अनगिनत खुशियाँ, मुस्कुराहटें उन नन्हें-मुन्ने बच्चों के चेहरों पर हमारे लिए एक प्रेरणा, जीवन के आभावों में भी खुश रहने की आनंदमय जीवन जीने की, आगे बढ़ने की हमारे लक्ष्य की प्राप्ति के लिए। जागृति यात्रा 2015 जो एक यादगार सफ़र बन कर हमारी ज़िन्दगियों मेें शामिल रहेगी और हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी ।

– आदित्य पटनी की कलम  से !!

(यात्री-2015)