महिला सोलर इंजीनियर्स का केन्द्र : तिलोनिया, राजस्थान

# जागृति यात्रा, 06 जनवरी चौदहवां दिन- ग्यारहवां पड़ाव- तिलोनिया,राजस्थान

ढोल-नगाड़ों का शोर, राजस्थानी लोकगीत और विशाल कठपुतली का प्रवेश द्वार पर स्वागत करना, हाथ जोड़ कर खड़े छोटे-छोटे बच्चे पूरी जागृति टीम को नमस्ते कहते हुये वातावरण में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर रहे थे । मौक़ा था जागृति यात्रा टीम के तिलोनिया राजस्थान स्थित, बेयरफुट कॉलेज परिसर पहुंचने का । पूरे जोश के साथ महिलाओं, बच्चों और स्थानीय लोगों ने अपनी स्थानीय संस्कृति से सभी का स्वागत करके यात्रियों को आत्मविभोर कर दिया ।

महिला सदस्यों ने लोकगीत के बाद “हम भारत की नारी हैं, फूल नहीं चिंगारी हैं.” जैसे नारों से दिन के कार्यक्रम की शुरूआत की। चारों तरफ़ हम सब एक हैं और हमारा नारा, भाईचारा जैसे नारे गूंज रहे थे । ये नज़ारा था सोलर इंजीनियर्स का घर कहे जाने वाले क़स्बे तिलोनिया का जो कि अजमेर के निकट- किशनगढ़, राजस्थान से लगभग 25 किमी. की दूरी पर स्थित है। तिलोनेिया के बेयरफुट कॉलेज में महिलाओं को सौर ऊर्जा की तकनीकों और यंत्रों को बनाने की ट्रेनिंग देने के साथ-साथ स्वच्छता, महिला शिक्षा तथा स्थानीय लोगों के कौशल का प्रयोग करके इस क़स्बे का विकास करने जैसे कार्यक्रम चलाये जाते हैंं ।

दूसरे सत्र के दौरान यात्रियों को 1972 में स्थापित बेयरफुट कॉलेज के संस्थापक एवं सामाजिक कार्यकर्ता बंकर रॉय से उनके अनुभवों को सुनने का मौक़ा मिला । बंकर रॉय ने अपने अनुभवों को साझा करते हुये कहा – “आप जितनी ज़्यादा उच्च डिग्री प्राप्त करते हैं, आपमें जोख़िम उठाने की क्षमता कम होती जाती है। हमारी औपचारिक शिक्षा पद्धति हमें असली भारत के दर्शन नहीं कराती.” “बिज़नेस मॉडल की नहीं साझेदारी मॉडल की बात कीजिये जैसा कि गांधी जी कहते थे कि ये धरती सभी इंसानों की ज़रूरतों के लिए पर्याप्त है लेकिन एक आदमी के लालच के लिए पर्याप्त नहीं है ।” हम अपनी सोलर कुकर वर्कशॉप में लर्निंग बाइ डूइंग और डूईंग बाई लर्निंग पद्धति के ज़रिए महिलाओं को सिखाते हैं ।

बंकर रॉय
बंकर रॉय

बेयरफुट परिसर में काम सीखने वाली महिलाओं को बंकर रॉय और उनकी टीम सोलर इंजीनियर कह कर बुलाते हैं । यात्रियों को आदर्श ग्राम कहे जाने वाले तिलोनिया के विकास में प्रमुख भूमिका निभाने वाली महिलाओं से परिचित होने और उनके अनुभव सुनने का मौक़ा मिला । ये महिलायें सोलर कुकर निर्माण, वेल्डिंग, कटिंग ये सारा काम इस गांव में रह कर करती हैं । सोलर कुकर, वाटर हीटर बनाती हैं ।

शहनाज़ एक महिला कार्यकर्ता इस बारे में अपने अनुभव साझा करते हुये कहती हैं- “सोलर कुकर में रेखागणित की ज़रूरत लगती है । एक-एक दो दो एम एम की गड़बड़ से वो काम नहीं करेगा। मैं बेयरफुट कॉलेज आई तो तीसरी कक्षा तक पढ़ी थी । यहीं आ के थोड़ा बहुत हिन्दी, अंग्रेज़ी बोलना सीखा ।”

बेयरफुट कॉलेज महिलाओं के विकास के लिए विशेष प्रावधान करके चलते हैं । एक महिला कार्यकर्ता जो कि बेयरफुत के लिए काम करती हैं और गांव के सरपंचों में भी सम्मिलित रही हैं, उनका कहना था कि – “ हर महिला में क्षमता होती है लेकिन उन्हें अवसर मिलना चाहिये कि वो आगे बढ़ सकें । सामाजिक विकास केवल भौतिक विकास से सम्भव नहीं होगा । मानसिक तौर पर जुड़ना ज़रूरी है । आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना आवश्यक है । महिलाओं के पास कोई विशेष कौशल नहीं था । शोध में पता चला कि सबसे बड़ी कमी ये थी कि वो महिलायें थी । हमने पाया कि उन पर काफ़ी पाबन्दियां थीं ।

महिलाओं पर होने वाले शारीरिक अत्याचारों पर भी हमने अध्ययन किया और फिर उन्हें सशक्त बनाने का प्रयास किया । तिलोनिया से इन महिलाओं का जुड़ाव इस स्तर का है कि दूर गांवों में होने वाली घटनाओं की ख़बर भी तिलोनिया तक पहुँचती है ।  महिलायें इस तरह जुड़ गई थीं कि बलात्कार जैसी घटनाओं की रिपोर्ट भी हम तक पहुँच रही थी । तिलोनिया को अपना पीहर समझती हैं महिलायें  और काफी गांवों के बीच हमारा नेटवर्क है।

इस समय अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और ज़िम्बाबवे से आई हुई महिलायें भी यहां सोलर कुकर, सोलर लालटेन और सोलर पैनल बनाने के विषय में जानकारियाँ प्राप्त कर रही हैं और सोलर इंजीनियर बनने की राह पर अग्रसर हैं । इन महिलाओं ने  अपने अंदाज़ में यात्रियों के लिए ज़ाम्बिया नृत्य भी प्रस्तुत किया और ‘वी शॉल ओवर कम’ गीत भी प्रस्तुत किया ।

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जूड केली जो कि यूरोप में सांस्कृतिक क्षेत्र में काफ़ी समय से काम कर रही हैं, महिला रोल मॉडल के रूप में सत्र का हिस्सा रहीं और यात्रियों से अपने विचार साझा किये ।