बिज़ ज्ञान ट्री के विजेता….

बिज़ ज्ञान ट्री यानि कि बिज़नेस ज्ञान ट्री जिसका प्रतीक है बरगद का एक वृक्ष । देवरिया पहुँचकर सभी यात्रियों ने उस बरगद के वृक्ष के दर्शन किये । बरगद के वृक्ष को इस प्रतियोगिता का केन्द्र बिन्दु और प्रतीक चुनने के पीछे की वजह बताते हुये जागृति के चेयरमेन शशांक मणि बताते हैं कि पुराने समय में हम इसी बरगद के वृक्ष के नीचे गुरूकुल पद्धति के तहत ज्ञान प्राप्त करते थे । उसी पद्धति का अनुकरण करते हुये बिज़नेस ज्ञान ट्री की संकल्पना की गई । इस प्रतियोगिता के विजयी रहे प्रतिभागियों के नवीन विचार इस प्रकार रहे ।

बिज़ ज्ञान ट्री प्रतियोगिता में टीम ‘आईरा’(AIRA)  कृषि एवं कृषि-व्यवसाय श्रेणी की विजेता रही । ‘आईरा’  संस्कृत भाषा का शब्द है और इसका अर्थ है – ताज़गी (रिफ्रेशमेन्ट) । इस समूह का आयाम कृषि पर आधारित रहा और इस समूह ने कपास के बीज से उत्पादित दुग्ध उत्पादों के निर्यात  की योजना प्रस्तुत की ।

मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में ‘बंजाराज़ फुटवियर’ टीम विजेता रही।  ग्रामीण क्षेत्र के लोग खेतों में नंगे पांव काम करते हैं जिससे उनके पैरों में कीड़े काटने या संक्रमण का ख़तरा रहता है लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं होती कि वो अपने पैरों को पूरी तरह ढक पाने वाले क्रॉक्स (CROCS) पहन सकें, इसलिए बंजाराज़ फुटवियर ऐसे लोगों के लिए एक ऐसा कार्यक्रम बनाया है जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए तकनीक की मदद से इंजेक्नशन मोल्डिंग मशीन की सहायता से पॉलीयूरीथिन का प्रयोग करके क्रॉक्स बनाने का तरीका सुझाया गया। जिसकी लागत मात्र 49 रूपये आयेगी जो कि उनके लिए ख़रीद पाना आसान होगा ।

शिक्षा एवं ज्ञान आयाम ( EDUCATION & KNOWLEDGE VERTICAL) के तहत ही टीम ‘कुशल’ विजयी रही जिन्होंने पारम्परिक शिक्षा तथा वोकेशनल ट्रेनिंग के मिश्रण से शिक्षा के क्षेत्र में काम करने के विचार की पेशकश की ।

शिक्षा और ज्ञान आयाम में ही विलसिटी’ टीम भी विजयी रही । शहरी इलाक़ों के ऐसे विद्यार्थी जो ग्रामीण क्षेत्र की जीवनशैली का अनुभव लेना चाहते हैं, वे इस कार्यक्रम का हिस्सा होंगे । ये अनुभवों के माध्यम से सिखाने वाला एक ऐसा कार्यक्रम है जहां शहरी क्षेत्र के बच्चों को एक हफ्ते के लिए ग्रामीण इलाकों के परिवारों में रहने के लिए भेजा जायेगा । एक परिवार में तीन बच्चे रहेंगे और आम जीवन के आम तौर-तरीक़ों और ग्रामीण जीवनशैली से जुड़े अनुभवों के ज़रिए खाना बनाना, कृषि तकनीक, कला और संस्कृति इत्यादि का आदान-प्रदान करेंगे । इनकी वित्त-प्रबन्धन  तकनीक के विषय में बताते हुये टीम सदस्यों ने बताया कि शहर के बच्चे जो इस प्रोग्राम का हिस्सा बनेंगे उन्हें एक निर्धारित शुल्क देना होगा जिसके माध्यम से जमा किये गये धन का प्रयोग ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा के लिए किया जायेगा ।  (टीम सदस्य – राहुल जैन, प्रितेश अग्रवाल, आरती, स्वप्न महाजन और समूह)

शिक्षा के ही क्षेत्र में  स्टार्टअप कम्पनी ‘स्किल मिल प्राइवेट लिमिटेड’  भी विजेता रही जिसके तहत वे किसानों, ग्रामीणों और बेरोज़गारों को कौशल विकास के क्षेत्र में प्रशिक्षित करके प्रवास (माइग्रेशन) की समस्या को रोकना चाहते हैं । टीम सदस्यों ने अंकित राज को अपनी कम्पनी के सीईओ के तौर पर चुना ।

कला, संस्कृति एवं खेल आयाम के अन्तर्गत टीम ‘दिति’ सफल रही। इस प्रोजेक्ट के तहत टीम दिति ने ये योजना बनाई कि देवरिया में बनाये जा रहे हस्तकला नमूनों को दुनिया तक पहुँचाकर उनकी संस्कृति से दुनिया को परिचित कराया जा सके तथा देवरिया के स्थानीय लोगों को उनकी कला के ज़रिए रोज़गार उपलब्ध हो सके। इस टीम का उद्देश्य है देवरिया और विश्व के विभिन्न देशों के बीच एक ऐसे संचार मंच (कम्युनिकेशन प्लेटफ़ॉर्म) का निर्माण करना जिससे देवरिया के लोगों की हस्तनिर्मित वस्तुयें ऑनलाइन बाज़ार में उपलब्ध हो और उन्हें अपनी कला का उचित मूल्य और बाज़ार मिल सके । इस तरह कौशल विकास को भी बढ़ावा मिलेगा और छोटे गांव देश की प्रगति में योगदान दे सकेंगे। इस टीम के सीईओ रहे  भार्गव सज्जला और मुख्य वित्त अधिकारी (चीफ फ़ाइनेंस ऑफिसर)  की भूमिका अनमोल अग्रवाल ने निभाई ।

ये वो कुछ चुनिन्दा टीमें रहीं जो भविष्य में जागृति के साथ जुड़कर अपने उद्यम विचारों को आगे बढ़ा सकती हैं ।