नये साल में बिज़ ज्ञान ट्री की तैयारियां..

#जागृति यात्रा (1 जनवरी, नौवां दिन- रेल यात्रा) बिज़ ज्ञान ट्री

जागृति यात्रा का काफ़िला अपने सफ़र के नौवें दिन बिज़ ज्ञान ट्री की दुनिया में प्रवेश कर चुका है । बिज़ ज्ञान ट्री उद्यमिता (आंत्रप्रन्योरशिप) का ऐसा वृक्ष है जिसमें रोज़गार का फल पनपता है, विकास की शाखायें पल्लवित होती हैं । नये व्यवसाय का बीज बड़ा होकर देश के विकास में अपनी भूमिका निभाता है । बिज़ ज्ञान ट्री के माध्यम से यात्रियों के लिए एक ऐसी वर्कशॉप का आयोजन किया जाता है जहाँ वो एक ग्रामीण पृष्ठभूमि में वहां की क्षेत्रीय शासकीय ईकाईयों से संवाद स्थापित करके उस क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक ज़रूरतों को समझते हैं और  अपने व्यवसाय की नींव रखते हैं और पहले स्तर की योजना बनाते हैं । इसी शुरूआती योजना को इन युवा उद्यमियों द्वारा भविष्य में ज़रूरत के अनुसार सुधार कर अपने उद्यम के रूप में तैयार किया जाता है ।

नव वर्ष में प्रवेश करने के साथ ही जागृति यात्रा 2015 अपने मुख्य उद्देश्य की ओर बढ़ रही है । नये साल के पहले दिन यात्रियों को अपने डिब्बों में अपने वेन्चर्स की योजनायें बनाते हुये पाया गया । गुजरात की जाह्नवी पटेल और उनकी टीम ने बिज़ ज्ञान ट्री प्रतियोगिता के लिए अपनी कम्पनी का नाम ‘आईरा’(AIRA) रखा है जो कि संस्कृत भाषा का शब्द है और इसका अर्थ है – ताज़गी (रिफ्रेशमेन्ट) । इस समूह का आयाम कृषि पर आधारित है और ये लोग कपास के बीज से उत्पादित दुग्ध उत्पाद ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचाने की योजना बना रहे हैं ।

एक और समूह के यात्री पुनीत गांधी जिनकी टीम ने उन्हें अपने वेन्चर का संस्थापक (सीईओ) चुना है, ऊर्जा क्षेत्र में काम करने की योजना बना रहे हैं । हालांकि अब तक उन्होंने अपने व्यवसाय के लिए कोई नाम नहीं सोचा है लेकिन उनकी टीम नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) का प्रयोग करके बायोगैस प्लान्ट स्थापित करते हुये स्कूल के बच्चों को मध्याह्न भोजन (मिड डे मील) पहुँचाना चाहती है । इसके अलावा ये टीम क्षेत्रीय समुदायों के बीच कचरा प्रबन्धन के प्रति जागरूकता फैला कर उन्हें कचरे को व्यवस्थित रूप से पृथक करने हेतु प्रशिक्षित करने की योजना भी इनके बिज़ ज्ञान ट्री अभ्यास का हिस्सा है ।

वहीं एक और समूह जिसने यात्री अंकित राज को अपनी कम्पनी के सीईओ के तौर पर चुना है, उनके स्टार्टअप का नाम ‘स्किल मिल प्राइवेट लिमिटेड’ है जिसके तहत वे किसानों, ग्रामीणों और बेरोज़गारों को कौशल विकास के क्षेत्र में प्रशिक्षित करके प्रवास (माइग्रेशन) की समस्या को रोकना चाहते हैं । इससे ज़्यादा पूछने पर समूह के सदस्य बताने को तैयार नहीं है जैसा कि वे अपनी प्रस्तुति से सबको अचम्भित कर देना चाहते हैं और आने वाले दिनों में देवरिया में इस प्रतियोगिता को जीतना चाहते हैं ।

दिन के बीच बीच में कई यात्री उद्यम कोर्प राम नारायण तिवारी से रू-ब-रू हुये और उनसे देवरिया के बारे में सवाल पूछे कि देवरिया क्या है ? मध्य भारत क्या है ?  देवरिया की समस्या क्या है ? राम इन सवालों का जवाब तो देते ही हैं साथ ही वो यात्रियों से कहते हैं कि – “सिर्फ़ बातें मत कीजिये,कुछ काम कीजिये । ये सच है कि समस्यायें हैं लेकिन समस्याओं की शिकायतें नहीं उनके समाधान लेकर आने का प्रयास कीजिये ।” राम अपने अनुभव साझा करते हुये कहते हैं कि लोग देवरिया को मैले-कुचैले लोगों का गांव समझते हैं । जिन्होंने देवरिया को नहीं देखा है, वो उसे आज भी स्लमडॉग मिलेनियर फिल्म के स्लम की तरह समझते हैं । 3 जनवरी को देवरिया इन यात्रियों के लिए बिज़ ज्ञान ट्री को आज़माने की प्रयोगशाला बनेगी ।