ये यात्री कुछ ख़ास है…

बाधाओं से ज़रा हाथ मिलाकर तो देखिये, मुश्क़िलों को ज़रा क़रीब जाकर तो देखिये,

ज़िद ठानिये कुछ नया करने की जो अग़र, तो ज़िद को ही अपनी ढाल बनाकर तो देखिये।

ऐसी ही ज़िद, जुनून और दिल में बदलाव की बयार लिए 22 साल का एक नवयुवक भारत-यात्रा पर निकला है । कुछ सपने तलाशने, कुछ नया करने, देश के विकास की एक मज़बूत कड़ी बनने । नाम है – ‘प्रेम सिंह दांगी’।

प्रेम बिहार के जमूई ज़िले में कटौना गांव का निवासी हैं और दूसरे उत्साहित युवाओं की तरह ही वो भी 8000 किमी. की इस जागृति रेल यात्रा में एक यात्री के तौर पर शामिल हुआ है। प्रेम के पिता एक किसान हैं और माँ गृहिणी हैं । 2 जनवरी प्रेम की ज़िन्दगी का बहुत ख़ास दिन है क्योंकि इसी दिन सन् 2013 में प्रेम ने अपने उस सपने की नींव रखी जो आज उसके जीवन का एकमात्र लक्ष्य बन चुका है । कहानी है प्रेम कुमार दांगी के शैक्षिक केन्द्र ‘अलक’ (ALAK  Education) की । अलक जिसका मतलब है ‘आस्क,लर्न एण्ड नो ’, जो कटौना गांव के ग़रीब बच्चों के लिए किसी क़रिश्मे से कम नहीं। ‘अलक ’ एड्यूकेशन सेन्टर में वर्तमान में लगभग 250 बच्चे मुफ़्त कोचिंग प्राप्त कर रहे हैं।

अलक शैक्षिक केन्द्र में कक्षा एक से कक्षा आठ तक के वे बच्चे निःशुल्क कोचिंग प्राप्त करते हैं जो बीपीएल तथा अन्त्योदय परिवारों से आते हैं। प्रेम बताता है कि वो अपने शैक्षिक केन्द्र में बच्चों का दाखिला लेने से पहले उनकी पारिवारिक और आर्थिक पृष्ठभूमि की जाँच-पड़ताल भी करता है जिससे उन बच्चों तक उनकी मदद पहुँच सके जिन्हें  वास्तव में इसकी ज़रूरत है ।

प्रेम से ये पूछने पर कि उनके दिमाग़ में बच्चों को पढ़ाने का विचार कैसे आया, वो बताता है कि दसवीं के बाद वो विज्ञान विषय से पढ़ना चाहता था लेकिन उसके एक शिक्षक ने उनके पिता जी से कहा कि अग़र वो गणित विषय से पढ़ता है तो आगे इंजीनियरिंग के लिए पैसे नहीं होंगे और अग़र जीव विज्ञान से पढ़ता है तो मेडिकल की पढ़ाई के पैसे नहीं होंगे इसलिए उन्हें वाणिज्य की पढ़ाई करनी चाहिये क्योंकि उसके लिए उनके परिवार को किसी ख़ास ख़र्च की ज़रूरत नहीं पड़ेगी और इस तरह प्रेम ने वाणिज्य (कॉमर्स) से इन्टरमीडिएट की पढ़ाई की। इसी दौरान उसके मन में ये ख़्याल आया कि जिस तरह उसे सही दिशा न मिलने के कारण अपना विषय चुनने की छूट नहीं मिली वो अपने गांव के दूसरे बच्चों के साथ वैसा नहीं होने देगा और इस तरह उसने अपनी स्नातक की शिक्षा के दौरान ही 2013 में इस शिक्षा केन्द्र की नींव रखी और कुछ समय बाद जब प्रधानमन्त्री ग्रामीण विकास योजना के तहत उनके गांव में आये प्रोजेक्ट कोर्डिनेटर आदित्य त्यागी से उसकी मुलाक़ात हुई तो उन्होंने प्रेम को इस शिक्षा केन्द्र का नामकरण करने की सलाह दी और उस समय इसका नाम पूछो, सीखो, जानो रखा गया जो बाद में बदलकर आस्क, लर्न एंड नो (ALAK) बन गया।

‘अलक’ को शुरू करने के लिए प्रेम ने कटौना के कम्युनिटी हॉल में जगह बनानी चाही ताकि वहां बच्चों को पढ़ाया जा सके मग़र वहां इलाके के लोग ताश और जुआ खेला करते थे इसलिए प्रेम कक्षा शुरू करने के आधे एक घंटे पहले जाकर उन लोगों से निवेदन करता कि वे लोग पढ़ाने के लिए जगह खाली कर दें क्योंकि बच्चे उन्हें ताश खेलते देखेंगे तो उन पर ग़लत असर पड़ेगा । धीरे-धीरे गांव के लोगों ने वहां ताश खेलना पूरी तरह से बन्द कर दिया ।

प्रेम घर-घर जाकर ट्यूशन भी पढ़ाता है और उसके ज़रिए कमाये हुये पैसों को वो अलक में पढ़ने वाले ग़रीब बच्चों को सुविधायें देने में ख़र्च कर देता है ।

इतिहास (ऑनर्स) में भागलपुर से स्नातक करने वाले प्रेम के मन में हमेशा से ही ये विचार था कि वो सरकारी नौकरी नहीं करना चाहता बल्कि वो कोई ऐसा काम करना चाहता था जो उनका ख़ुद का हो और जिसमें उसे किसी की जी हुज़ूरी न करनी पड़े । साथ ही प्रेम का सपना है कि शिक्षा को लेकर जिस असमंजस और परेशानी का सामना उन्हें करना पड़ा वो उनके गांव के बच्चों को न करना पड़े । जब उन्होंने बच्चों को इस तरह पढ़ाना शुरू किया तो उनके पिता जी कहते थे कि – “ये समाजसेवा जैसा काम पैसे वाले लोगों के लिए है, तुम ये सब छोड़ो और या तो अपना पढ़ाई करो नहीं तो कोई नौकरी करो। इनसब से कुछ नहीं होगा।”  प्रेम के पिताजी ने उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने पटना भेज दिया पर वहां भी प्रेम का मन नहीं माना और उसने गली-मुहल्ले के ग़रीब बच्चों को ढूँढ कर पढाना शुरू कर दिया । प्रेम बताते हुए भावुक हो जाता है कि कैसे उसके मन में ये ख़्याल घूमता रहता कि कटौना में रहने वाले बच्चे उसका इन्तज़ार कर रहे होंगे और उसे किसी भी तरह वहाँ जाना है। प्रेम के पटना में ग़रीब बच्चों को पढ़ाने की ख़बर उनके गांव के कुछ लोगों के ज़रिए उनके पिता जी तक पहुंची और पिता जी ने उसे ये सोचकर कटौना वापस बुला लिया कि वो वहां अपनी पढ़ाई नहीं कर रहा बल्कि पैसा बरबाद कर रहा है ।

पटना से कटौना वापस आकर प्रेम ने फिर से पढ़ाना शुरू कर दिया। उनके इस काम में शुरू से ही कुछ दोस्तों ने साथ दिया जो आकर अलक के बच्चों को मुफ़्त शिक्षा देते रहे और आज भी दे रहे हैं। करजन कुमार, अजय कुमार मंडल, बमबम कुमार शाह, अभिषेक शाह और रोहित दुबे, ये सभी युवा अलग-अलग विषय पढ़ाने में प्रेम का सहयोग करते हैं। करजन विडियोग्राफी और मिक्सिंग भी सिखाते हैं ।

प्रेम के परिवार में तीन बहनें हैं और उन तीनों की शादी भी ज़मीनें बेच कर हुई लेकिन प्रेम के उत्साह को देखकर आपको उससे सहानुभूति नहीं होती बल्कि उसका उत्साह आपको झकझोर देगा कुछ नया करने के लिए । उसके परिवार की सालाना आय लगभग 40 हज़ार रूपये है पर उसका समाज के लिए योगदान करने का हौंसला अनमोल है। प्रेम हंसते हुये बताता है कि उसके घरवाले उस पर शादी के लिए दबाव बना रहे हैं ताकि घर में माता-पिता की मदद हो सके लेकिन प्रेम इस स्थिति से बचने के लिए कभी कभी घर पर खाना भी बनाता है जब उसके माता-पिता खेतों में काम कर रहे होते हैं ।

हाल ही में प्रेम ने एनडीएलएम के डिज़िटल इंडिया अभियान के तहत आई-सक्षम संस्था की मदद से बच्चों को कम्प्यूटर शिक्षा देना भी शुरू किया है । जिसके अन्तर्गत 14 से 60 साल की उम्र तक के 50 विद्यार्थी कम्प्यूटर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं ।

प्रेम अपनी बात ख़त्म करते हुये कहता है – “इस यात्रा में आकर मुझे कितनी ख़ुशी और कितना हौंसला मिला है कि जिसे लाखों रूपये पाकर भी मैं बयाँ नहीं कर सकता। मैं बस ये चाहता हूँ कि मुझे कोई न जानें पर जो बच्चे अलक में पढ़ रहे हैं वो अपना रास्ता बनायें और दुनिया में नाम कमायें।”

 

  

 

  • Rajeev kumar

    keep it up mahesh.
    मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगा।

  • Hi

    My self is Rohit and I am part of ALAK Education. I want to share my feelings with the team who really eager to to know about this.
    we( Mahesh, Karjan, Sonu Bambam) are from primary family from ‘Katouna’ which is situated in Jamui District in Bihar.Our team is really proud of Mahesh for his strain, we have planted the ALAK in 2012 with the help of our trail-blazer Mr. Aditya and Mr. shravan who helped us beyond of the pale.
    we have faced many problem to stand this but if you try hard you will success, at the current time we have more than 250 poor children who are not able to bear their education, we provide them free basic education which gives us immeasurable happiness. We also want to thank Jagriti Team who wrote the blog for us. Please help us to spread this idea in whole country so that everyone can learn their basics.

    Regards
    Rohit

  • महेश उर्फ़ प्रेम सच में आप बहुत बड़ा काम कर रहे है और आगे भी करते रहिये । i-Saksham अपने स्तर से आप को हर संभव प्रयास करेगा। जाग्रति यात्रा एक ऐसी यात्रा है जिसमे जाने के बाद हर एक यात्री की उर्जा 10 गुनी बढ़ जाती है । आप ने तो सारे यात्रियों की उर्जा बढ़ा दी। हमे आप पर गर्व है की आप हमारे राज्य और जिले के है और उस से भी अधिक आप मेरे मित्र जो हो।

    अमर कुमार
    जाग्रति यात्री 2013
    (जमुई,बिहार)