आइये सदाबहार क्रान्ति की ओर चलें….

#जागृति यात्रा (29 दिसम्बर- छठा दिन- पाँचवां पड़ाव – चेन्नई )

‘उद्यम द्वारा भारत निर्माण’ का लक्ष्य लिए जागृति यात्रा का कारवां 29 दिसम्बर को चेन्नई के एम.एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउण्डेशन पहुँचा जहां यात्रियों ने उद्यम के प्रमुख आयामों में से एक कृषि क्षेत्र के व्यवसायिक प्रतिरूप को समझने के लिए भारत में हरित क्रान्ति के जनक कहे जाने वाले प्रोफेसर एम. एस. स्वामीनाथन जी का व्याख्यान सुना । उन्होंने यात्रियों से रू-ब-रू होते हुये भारत निर्माण के मार्ग में कृषि क्षेत्र की आवश्यकताओं, चुनौतियों और सतत् ग्रामीण विकास की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला ।

द एम.एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउण्डेशन की स्थापना सन् 1988 ई. में एक ग़ैर लाभ आधारित संस्था के तौर पर प्रोफेसर एम. एस. स्वामीनाथन द्वारा की गई  थी । इस संस्था का लक्ष्य आधुनिक विज्ञान के प्रयोग द्वारा कृषि, ग्रामीण विकास और और जनजातीय समुदायों के जीवन को बेहतर बनाना और उन्हें जीविका प्रदान करना है । एम. एस. स्वामीनाथन शोध केन्द्र  ग़रीबों, महिलाओं और प्रकृति से जुड़ी समस्याओं के प्रति ख़ास लगाव रखता है और ग्रामीणों की कृषि, भोजन और पोषण की आवश्यकताओं को विज्ञान और तकनीक के माध्यम से सुलझाने का प्रयास करता है ।

प्रोफेसर स्वामीनाथन जी ने अपने व्याख्यान में सस्टेनेबल डेवेलपमेन्ट (सतत् विकास) और एवरग्रीन रेवोल्यूशन  (सदाबहार क्रांति ) पर ज़ोर दिया । उनका कहना था कि हमें उत्पादकता बढ़ाने के उपाय तो करने होंगे लेकिन हमें इस बात का ध्यान रखना होगा कि हम प्रकृति को नुकसान ना पहुंचायें और भावी पीढ़ोयों के लिए प्राकृतिक स्त्रोतों को बचाते हुये एवरग्रीन क्रांति (सदाबहार क्रांति ) और सतत् विकास को बढ़ावा दें ।

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ट्रेन में वापस आने पर कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के प्रोजेक्ट स्किल इंडिया के तहत वैभव गुप्ता और निहाल रस्तोगी ने यात्रियों को समानान्तर पैनल चर्चा में कौशल विकास के क्षेत्र में उद्यमिता की संभावनाओं और तरीक़ो से रू-ब-रू कराया और इस तरह यात्रा के  छठवें दिन यात्रियों ने उद्यम के नये आयामों के विषय में जाना ।