मानवता के नाम : अरविन्द आई केयर सिस्टम

#जागृति यात्रा (28 दिसम्बर- पाचवां दिन- चौथा पड़ाव – मदुरई )

‘मुझे आप लोगों से ईर्ष्या हो रही है । आप सब यहां क्यूं हैं ? और अग़र आप इस दुनिया में आये हैं तो आप भविष्य में क्या करने वाले हैं ?’ इन तीन पहलुओं पर प्रकाश डालते हुये डॉ. एस. अरविन्द ने अरविन्द आई केयर सेन्टर, मदुरई में स्वास्थ्य क्षेत्र के व्यक्तित्व- व्याख्यान (रोल मॉडल डिस्कशन) का आरम्भ किया । जागृति यात्रा 2015 का सफ़र पांचवे दिन कवियों और मंदिरों की सांस्कृतिक नगरी मदुरई पहुँच चुका था । जहां सभी यात्रियों के पास मानवता की सेवा में समर्पित अरविन्द आई केयर सिस्टम के बिज़नेस मॉडल को समझने का मौक़ा था ।

डॉ. अरविन्द ने आगे कहा कि 2030 में भारत विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश होगा और हम इस उत्तरदायित्व के वाहक बनने जा रहे हैं । हम वर्तमान समय में डिजीटल दुनिया में रह रहे हैं जहाँ आपके लिये सूचनायें पाना आसान है जो कि हमारे समय में नहीं था और इसलिये इस मामले में आपसे ईर्ष्या महसूस करता हूं कि आप कितने भाग्यशाली हैं । डॉ. अरविन्द ने कहा कि ‘सफलता वो होती है जो आप प्राप्त करते हैं और परिवर्तन वो होता है जो आपके ज़रिए होता है ।’

डॉ. एस. अरविन्द
डॉ. एस. अरविन्द

अरविन्द आई केयर एक ऐसी संस्था है जो मोतियाबिन्द के रोगियों को सब्सिडाइज़्ड मूल्य पर सर्जरी उपलब्ध करवाती  है और उच्च तकनीक की मदद से  ये सब चन्द मिनटों में हो जाता है । दस मिनट की सर्जरी से 7.5 मिलियन लोगों की आंखें ठीक की जा सकती हैं। अरविन्द आई  केयर दुनिया का सबसे बड़ा आई केयर सेन्टर है और इसकी शुरूआत डॉ. जी वेंकटस्वामी द्वारा 58 वर्ष की उम्र में की गई थी जो इस बात की मिसाल है कि कुछ भी नया शुरू करने के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती । आप कभी भी कहीं से भी शुरूआत कर सकते हैं । जैसा कि डॉ. जी. वेंकटस्वामी कहते थे – ‘केवल विद्वता और क्षमतायें पर्याप्त नहीं हैं  बल्कि कुछ अद्भुत और सुन्दर करने का एहसास भी होना चाहिये ।’ अरविन्द आई केयर केन्द्र अनावश्यक अन्धता को देश से मिटाने हेतु प्रतिबद्ध है क्योंकि भारत में अन्धेपन के सबसे ज़्यादा रोगी हैं और इसमें 80 % अन्धता ऐसी है जिसे ठीक किया जा सकता है । इस संस्था की एक और ख़ास बात ये है कि यहां 85%  महिला कार्यकर्तायें सम्मिलित हैं जिससे महिला सशक्तिकरण को बल मिल रहा है । ये संस्था ग्रामीण इलाकों की लड़कियों को नर्सिंग की शिक्षा देकर उन्हें रोज़गार भी मुहैया करा रहे हैं ।

डॉ. एस. अरविन्द यात्रियों को मदुरई की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से परिचित कराते हुए कहते हैं कि मदुरई का प्रसिद्ध मीनाक्षी मन्दिर आज से  लगभग 1000 साल पहले बनाया गया था । इसे बनाने का काम मदुरई के राजा विश्वनाथ नायक द्वारा 15वीं शताब्दी में आरम्भ किया गया था जिसे कुल 10 पीढ़ीयों ने मिलकर उस रूप में निर्मित किया जैसा कि हम इसे वर्तमान में पाते हैं । डॉ.अरविन्द के व्याख्यान और अरविन्द आई केयर की स्थापना एवं कार्यप्रणाली को एक डॉक्युमेन्ट्री के ज़रिये समझने के बाद एक पैनल चर्चा भी हुई जिसमें डॉ आर. डी. चन्द्रन, डॉ. ऊषा और स्वयं डॉ. अरविन्द ने यात्रियों को अरविन्द आई केयर के व्यवसायिक प्रतिरूप (बिज़नेस मॉडल) से जुड़े सवालों का जवाब दिया ।

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अन्त में मदुरई की संस्कृति से परिचित कराने वाले तमिल गीत ‘ इंगा मदुरै’ ने उत्साह का समाँ बांध दिया । सब झूम उठे और एक बार फिर ये साबित हो गया कि संगीत की कोई भाषा और कोई ज़ुबान नहीं होती । यात्रियों ने पैनल चर्चा के बाद अरविन्द आई केयर हॉस्पिटल का दौरा भी किया और उनकी कार्यप्रणाली को समझा । इसके बाद सभी यात्री मदुरई की धड़कन मीनाक्षी मन्दिर घूमने गये और उस लम्हे को सभी ने अपने सेल फोन्स के कैमरे में क़ैद करने की कोशिश की और इस तरह उत्साह, नई सीख, सांस्कृतिक नगरी के अनुभव के साथ जागृति यात्रा का चौथा दिन रात की गोद में विश्राम करने जा चुका था ।

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