अक्षयपात्रा से गीतम तक….

#जागृति यात्रा (30 दिसम्बर, सातवां दिन – पांचवां पड़ाव – विशाखापट्टनम)

30 दिसम्बर को जागृति रेल यात्रा विशाखापट्टनम, आंन्ध्र-प्रदेश पहुँची जहाँ यात्रियों ने अक्षय-पात्रा फाउण्डेशन के बिज़नेस मॉडल को समझा । अक्षयपात्रा फाउण्डेशन, हैदराबाद के अध्यक्ष और अक्षयपात्रा नेशनल गर्वनिंग कांउसिल मेम्बर श्रीमन सत्या गौरा चन्द्र दासा यात्रियों से रू-ब-रू हुये और उन्होंने बताया कि किस तरह अक्षयपात्रा की शुरूआत एक मन्दिर के बाहर ग़रीब लोगों को भूखा देखकर खाना खिलाने के एक विचार से हुई जो बाद में बच्चों को भोजन देने के ज़रिए उन्हें शिक्षा केन्द्र तक लाने का कारण बन गई ।

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A day in the life of an Udyam Corp

Being a part of the nation building process is exciting as well as challenging, and at the same time it gives a feel of contentment. That explains why the job of an Udyam Corp attracts passionate individuals who want to use their skill set and professional expertise in building a better nation.

Wondering who is an Udyam Corp? In simple words, Udyam Corps are the ground soldiers in Jagriti Entrepreneurial Network. Their workspace shifts from under a banyan tree in a rural village to lavishly created corporate institutions. They deal with top notch business magnets as well as spend time with struggling rural farmers. They enjoy high professional growth while contributing to nation building on a greater level.

Udyam Corps are those selected employees who work at the grass root level in chosen locations, to promote the enterprise eco system by facilitating the support system for small and medium businesses. They act as connectors between grass root level small and medium business owners to top level managements. Furthermore, they make sure to utilise the wide and diverse network of yatris of Jagriti Yatra in every aspects of business formation and the entrepreneurial journey that follows as well.

A day in the life of an Udyam Corp is never confined to a designated office space. They work and interact with people on locations where Jagriti Entrepreneurial Centre focuses on. Enhancing local collaborations is one of the primary responsibilities of Udyam Corps. The rural folks often lack opportunities to intermingle with people from the outside world and that keeps them in dark. Udyam Corps create opportunities for the villagers to meet with successful individuals, and also to know about the advancements happening around the world in their field of work.

While creating awareness about entrepreneurship, Udyam Corps ensure that they cultivate a strong bonding with the people to help them out in excelling in their field of business. Apart from analysing the business model, they help them in value chain analysis, cost benefit analysis, pricing, etc. In short, they act as a business consultant for the unprivileged people in Middle India, and that is where the analytical excellence and professional exposure of the Udyam Corps matter. The job of Udyam Corp is extended to ensuring that proper support reaches the entrepreneur on terms of funding, technology, resources, etc.

To be an Udyam Corp you need to have a strong passion towards developing Middle India, other than professional experience and academic excellence. Leadership qualities, organisational management, capability to adapt to challenging situations, etc also matters. By boosting the entrepreneurial ecosystem, JEN hopes to meet the goal of enterprise led government.

‘Revolution should be evergreen’

Destination 4: M S Swaminathan Foundation, Chennai

‘The talk over green revolution is ending. Now it is time for evergreen revolution.’ As goes the message from the father of green revolution, M S Swaminathan. The fourth destination of Jagriti Yatra, on its sixth day, was at M S Swaminthan Research Foundation, Chennai, during when the founder himself gave a lecture on agriculture revolution.

His message for the yatris goes as, ‘Jagriti Yatra is a wonderful idea, as you get the glimpse of India, the diversity and pluralism, and the pluralism is the strength of India. Diversity of people, languages, cuisines; we must nurture it, protect it, promote it. Make the best of everyday you have left on the yatra.’

Yatris had a great opportunity to visit the institution dedicated to research on sustainable agriculture and rural development. It was started in 1988 with an aim to accelerate use of modern science for agricultural and rural development for development and dissemination of technology to improve the lives and livelihoods of tribal and rural communities.

Yatris who have selected agriculture as their vertical of interest had an unforgettable day spending on the premises of the research institution. The speech was enlightening as well.

The yatra has crossed over five destinations by now, and the excitement of yatris is not setting down and that makes Jagriti Yatra the journey of life time.

Focus on healthcare on third role model visit

Destination 3: Arvind Eye Care, Madurai

The importance of health care can never be minimised on any conditions and in a developing country like India the government cannot alone meet the health care needs of its people, given its growing population, income status and inadequate infrastructure. That is why entrepreneurial ventures in healthcare sector is really a need of the hour.

Dr. Venkataswamy, founder of Arvind Eye Care, wishes to establish an alternate health care model that could supplement the efforts of the government and also be self supporting. The third destination of Jagriti Yatra 2015 focused on the health care sector, and yatris spent a day analysing and understanding Arvind Eye Care and AuroLab.

Situated in the temple city of Madurai, Arvind Eyecare has become the final word for best eye care treatment for almost four decades now. Aurolab, started in 1991, is a pioneer in the production of high quality ophthalmic consumables at affordable prices to developing countries.

A visit to Arvind eye care and the interaction with the founder made the third role model visit of Jagriti Yatra wonderful and inspiring.

आइये सदाबहार क्रान्ति की ओर चलें….

#जागृति यात्रा (29 दिसम्बर- छठा दिन- पाँचवां पड़ाव – चेन्नई )

‘उद्यम द्वारा भारत निर्माण’ का लक्ष्य लिए जागृति यात्रा का कारवां 29 दिसम्बर को चेन्नई के एम.एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउण्डेशन पहुँचा जहां यात्रियों ने उद्यम के प्रमुख आयामों में से एक कृषि क्षेत्र के व्यवसायिक प्रतिरूप को समझने के लिए भारत में हरित क्रान्ति के जनक कहे जाने वाले प्रोफेसर एम. एस. स्वामीनाथन जी का व्याख्यान सुना । उन्होंने यात्रियों से रू-ब-रू होते हुये भारत निर्माण के मार्ग में कृषि क्षेत्र की आवश्यकताओं, चुनौतियों और सतत् ग्रामीण विकास की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला ।

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अरविन्द आई केयर :- एक संस्मरण

जब तक मैं यह लिखूंगा, तब तक जागृति यात्रा का आंठवा संस्करण ‘मंदिरों और कवियों के शहर’ मदुरई में अपने पड़ाव‘अरविंद आई हॉस्पिटल’ से निकल कर चेन्नई की ओर अग्रसर होगा ।

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मुझे २०१० में जगृति यात्रा के माध्यम से ‘अरविंद आई केयर’ से रूबरू होने का अवसर प्राप्त हुआ और फिर २०११ में  पुनः इंजन रूम क्लब (engine room club) के साथ मैं यहाँ आया । दोनों मौकों पर मुझे अरविंद आई केयर के संस्थापक डॉ. वेंकटस्वामी के बारे में जानने का अवसर मिला और यही मेरे लिए यात्रा में सबसे ज़्यादा प्रभावशाली अनुभव रहा । टालने योग्य अंधापन हमेशा से ही भारत की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं में मुख्य रूप से चिंता का विषय रहा है | भारत जैसी विकसित होते देश की सरकार के लिए भी अकेले इससे निपटना काफी नहीं है। इन सबको ध्यान में रखते हुए डॉ. वेंकटस्वामी ने एक ऐसे वैकल्पिक स्वास्थ्य प्रतिरूप की कल्पना की जो न कि केवल सरकार द्वारा चल रही मुहिमों का संपूरक हो अपितु आत्म-निर्भर भी हो । इसी को ध्यान में रखतेहुए  डॉ. वेंकटस्वामीने 1976 में 58 वर्ष कि उम्र में GOVEL ट्रस्ट एवं Aravind Eye Hospital की स्थापना की ।  (अस्पताल का नाम श्री अरबिंदो के नाम पर रखा गया ।) उनकी कहानी सारे बहानों को नष्ट कर देती है । उनका कथन “बुद्धिमत्ता एवं क्षमता होना ही काफी नहीं हैं, वे कुछ सुन्दर करने का एहसास भी होने चाहिए” मेरे लिए प्रेरणा स्त्रोत है।

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अरविंद आई केयर में कदम रखने मात्र  से ही एक ऐसा अनुभव प्राप्त  हुआ जिसको शब्दों में बयान करना मेरी कल्पना से परे हैं । यहाँ मुझे करुणा, सौहार्द, आभार, विनम्रता,  निष्ठा,  दूसरों  की  निःस्वार्थ सेवा,आध्यात्मिक चेतना और आधुनिक तकनीक का परस्पर सामंजस्य देखने को मिला। मेरे आस पास का सम्पूर्ण वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भर गया । नवचेतना का संचार हुआ। शायद दुनिया को देखने का मेरा नजरिया बदल चुका  था । वहाँ से जाते जाते मेरी नज़र एक चिट्ठी पर गई, जो एक उपचार के लिए आए रोगी ने लिखी थी :-

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                                                                                               – मयंक जैन (पूर्व यात्री)

मानवता के नाम : अरविन्द आई केयर सिस्टम

#जागृति यात्रा (28 दिसम्बर- पाचवां दिन- चौथा पड़ाव – मदुरई )

‘मुझे आप लोगों से ईर्ष्या हो रही है । आप सब यहां क्यूं हैं ? और अग़र आप इस दुनिया में आये हैं तो आप भविष्य में क्या करने वाले हैं ?’ इन तीन पहलुओं पर प्रकाश डालते हुये डॉ. एस. अरविन्द ने अरविन्द आई केयर सेन्टर, मदुरई में स्वास्थ्य क्षेत्र के व्यक्तित्व- व्याख्यान (रोल मॉडल डिस्कशन) का आरम्भ किया । जागृति यात्रा 2015 का सफ़र पांचवे दिन कवियों और मंदिरों की सांस्कृतिक नगरी मदुरई पहुँच चुका था । जहां सभी यात्रियों के पास मानवता की सेवा में समर्पित अरविन्द आई केयर सिस्टम के बिज़नेस मॉडल को समझने का मौक़ा था ।

डॉ. अरविन्द ने आगे कहा कि 2030 में भारत विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश होगा और हम इस उत्तरदायित्व के वाहक बनने जा रहे हैं । हम वर्तमान समय में डिजीटल दुनिया में रह रहे हैं जहाँ आपके लिये सूचनायें पाना आसान है जो कि हमारे समय में नहीं था और इसलिये इस मामले में आपसे ईर्ष्या महसूस करता हूं कि आप कितने भाग्यशाली हैं । डॉ. अरविन्द ने कहा कि ‘सफलता वो होती है जो आप प्राप्त करते हैं और परिवर्तन वो होता है जो आपके ज़रिए होता है ।’

डॉ. एस. अरविन्द
डॉ. एस. अरविन्द

अरविन्द आई केयर एक ऐसी संस्था है जो मोतियाबिन्द के रोगियों को सब्सिडाइज़्ड मूल्य पर सर्जरी उपलब्ध करवाती  है और उच्च तकनीक की मदद से  ये सब चन्द मिनटों में हो जाता है । दस मिनट की सर्जरी से 7.5 मिलियन लोगों की आंखें ठीक की जा सकती हैं। अरविन्द आई  केयर दुनिया का सबसे बड़ा आई केयर सेन्टर है और इसकी शुरूआत डॉ. जी वेंकटस्वामी द्वारा 58 वर्ष की उम्र में की गई थी जो इस बात की मिसाल है कि कुछ भी नया शुरू करने के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती । आप कभी भी कहीं से भी शुरूआत कर सकते हैं । जैसा कि डॉ. जी. वेंकटस्वामी कहते थे – ‘केवल विद्वता और क्षमतायें पर्याप्त नहीं हैं  बल्कि कुछ अद्भुत और सुन्दर करने का एहसास भी होना चाहिये ।’ अरविन्द आई केयर केन्द्र अनावश्यक अन्धता को देश से मिटाने हेतु प्रतिबद्ध है क्योंकि भारत में अन्धेपन के सबसे ज़्यादा रोगी हैं और इसमें 80 % अन्धता ऐसी है जिसे ठीक किया जा सकता है । इस संस्था की एक और ख़ास बात ये है कि यहां 85%  महिला कार्यकर्तायें सम्मिलित हैं जिससे महिला सशक्तिकरण को बल मिल रहा है । ये संस्था ग्रामीण इलाकों की लड़कियों को नर्सिंग की शिक्षा देकर उन्हें रोज़गार भी मुहैया करा रहे हैं ।

डॉ. एस. अरविन्द यात्रियों को मदुरई की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से परिचित कराते हुए कहते हैं कि मदुरई का प्रसिद्ध मीनाक्षी मन्दिर आज से  लगभग 1000 साल पहले बनाया गया था । इसे बनाने का काम मदुरई के राजा विश्वनाथ नायक द्वारा 15वीं शताब्दी में आरम्भ किया गया था जिसे कुल 10 पीढ़ीयों ने मिलकर उस रूप में निर्मित किया जैसा कि हम इसे वर्तमान में पाते हैं । डॉ.अरविन्द के व्याख्यान और अरविन्द आई केयर की स्थापना एवं कार्यप्रणाली को एक डॉक्युमेन्ट्री के ज़रिये समझने के बाद एक पैनल चर्चा भी हुई जिसमें डॉ आर. डी. चन्द्रन, डॉ. ऊषा और स्वयं डॉ. अरविन्द ने यात्रियों को अरविन्द आई केयर के व्यवसायिक प्रतिरूप (बिज़नेस मॉडल) से जुड़े सवालों का जवाब दिया ।


अन्त में मदुरई की संस्कृति से परिचित कराने वाले तमिल गीत ‘ इंगा मदुरै’ ने उत्साह का समाँ बांध दिया । सब झूम उठे और एक बार फिर ये साबित हो गया कि संगीत की कोई भाषा और कोई ज़ुबान नहीं होती । यात्रियों ने पैनल चर्चा के बाद अरविन्द आई केयर हॉस्पिटल का दौरा भी किया और उनकी कार्यप्रणाली को समझा । इसके बाद सभी यात्री मदुरई की धड़कन मीनाक्षी मन्दिर घूमने गये और उस लम्हे को सभी ने अपने सेल फोन्स के कैमरे में क़ैद करने की कोशिश की और इस तरह उत्साह, नई सीख, सांस्कृतिक नगरी के अनुभव के साथ जागृति यात्रा का चौथा दिन रात की गोद में विश्राम करने जा चुका था ।


Public transport solution app from our yatripreneur

#meettheyatripreneur –Prashanth Garapati

Prasanth Garapati, an IIIT student, was one among our youngest yatris in Jagriti yatra 2013. It is hardly two years, and he has embarked on an entrepreneurial journey with a wonderful solution provider mobile app for the problems you face in public transport system.

Commut, the ride sharing app, helps customers to book a seat in the 12 seated vehicle or mini-bus, and enjoy the ride at one by fourth of the price they pay while hiring a cab. The mini bus runs on predefined roads and stops at a predefined place which has been selected as per the suggestions from the customers. The running slots as of now are 8 am to 11 am and 6 pm to 9 pm in the evening.

Commut was able to get around 50-60 communters within 2 months of inception, and among which 70% are women. In order to ensure the safety of the commuters, Commut has integrated route tracking system in the app. Moreover, the drivers are appointed after verifying around ten documents along with a background check. The drivers get paid every as per the rides.

Prasanth is joining Jagriti Yatra 2015 as a resource person to motivate youngsters to forget the fear of failure and work towards their goals in life. He says, “The best takeaway for me after completing the Jagriti Yatra is to be the change if you want to change your life. I was deeply moved by the impact created by the role models before twenty or thirty years ago. Moreover, the help from the network of yatris made my journey easier.” He will travel and interact with yatris on the train for four days to give inspiration to yatris.

Isn’t entrepreneurship a spiritual process?

Destination 2: Art of Living, Bangalore

Jagriti Yatra is the journey of awakening, and the awareness leads to set greater goals in life and work passionately towards creating a better world. The second destination of Jagriti Yatra 2015 is Bangalore, which is well acclaimed as the Silicon Valley of India. This year the location was the Art of Living (AOL) centre in Bangalore, which turned out to be an amazing experience for the yatris.

The interactive session with the spiritual guru Shri Shri Ravi Shankar was indeed thought-provoking, and a real motivation for the yatris to lead a life of excellence. With its humble beginning as a small school in a sleepy village in 1981, Art of Living Foundation has now established its presence in 155 countries and empowering millions of people to live a peaceful life. A day on AOL and an interactive session of one hour with Shri Shri Ravi Shankar has made the day memorable for the yatris.

Here is the takeaway from the interactive session with the guru which is a piece of motivation for every passionate youth, “To be in a comfort zone is a sign of old age. What other feels difficult, it is entertainment for the youth.”

The noon session was also reviewed as equally motivating, as it started with a session by N. S. Parthasarathi, CEO of Mindtree. It followed with a panel discussion about Digital India, in which Shradha Sharma, Founder of Yourstory, took the role of moderator. Rahul Yadav, the brain behind Housing.com, was among the panelists, and the yatris listened to the story of his entrepreneurial journey.

आर्ट ऑफ लिविंग केन्द्र में एक दिन

#जागृति यात्रा (27 दिसम्बर, चौथा दिन – तीसरा पड़ाव – बंगलौर)

शांत वातावरण, शरीर को छूती शीतल हवा, ऊर्जापूर्ण परिवेश, सन्नाटे को चीरती हुई युवाओं की श्वांस ध्वनि और लगभग ६०० यात्रियों के इस शांत समूह को निर्देशित करती एक आवाज़ । ये दृश्य था बंगलौर में आर्ट ऑफ लिविंग केन्द्र में श्री श्री रविशंकर जी के सानिध्य में बैठे जागृति यात्रा के युवा यात्रियों के सफ़र के आध्यात्मिक पड़ाव का ।

जीवन की किसी भी यात्रा के दौरान आपके भीतर एक आंतरिक यात्रा साथ- साथ चलती रहती है । जिसे अनुभव करने की आपको आवश्यकता होती है । ये संदेश था जागृति यात्रा के दूसरे पड़ाव आर्ट ऑफ लिविंग (AOL) सेन्टर, बंगलौर के आध्यात्मिक परिवेश का । जागृति जैसा कि नाम से ही ज्ञात होता है एक ऐसी यात्रा जो आपको जाग्रत कर सके  और यही जागृति आपको अपने जीवन के बड़े लक्ष्यों और अपने काम के प्रति उत्साह की ओर ले जाती है जो दुनिया को रहने के लिए एक बेहतर जगह बनाती है ।


भारत की सिलिकन वैली कहा जाने वाला बंगलौर जागृति यात्रा का दूसरा पड़ाव था जहाँ  यात्रियों को आर्ट ऑफ लिविंग सेन्टर में आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर जी के सानिध्य में प्रेरक व जीवन को नवदिशा प्रदान करने वाले अनुभवों की प्राप्ति हुई । 1981 में एक पिछड़े और छोटे से विद्यालय के रूप में शुरू हुआ आर्ट ऑफ लिविंग फाउण्डेशन आज दुनिया के लगभग 155 देशों में अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराते हुये लोगों को एक शान्तिपूर्ण जीवन जीने की कला सिखा कर सशक्त बना रहा है । आर्ट ऑफ लिविंग सेन्टर के शांत और स्वच्छ वातावरण में बिताया एक दिन और आध्यात्म गुरू श्री श्री रविशंकर से हुये संवाद से यात्रियों ने नई ऊर्जा का अनुभव किया ।

एक यात्री के प्रश्न पूछने पर कि जीवन में भावनात्मक पहलू को कैसे संतुलित किया जाये,श्री श्री रविशंकर जी मुस्कुराते हुये उत्तर देते हैं कि ‘जैसे आप साइकिल चलाते हुये संतुलन बिठाते हैं, ये ठीक वैसी ही प्रक्रिया है”। साथ ही वो अपने संवाद के दौरान कहते हैं कि “यदि आप सहज होते जा रहे हैं (इफ यू आर सेट इन टू योर कम्फ़र्ट ज़ोन) तो इसका तात्पर्य यह है कि आपकी उम्र बढ़ रही है और आप बूढ़े हो रहे हैं क्योंकि जिन कार्यों को करना दूसरों के लिए कठिन होता है उसे युवा बड़े उत्साह से करते हैं ।”

इस आध्यात्मिक सत्र के बाद दूसरे सत्र में यात्रियों को ‘माइन्ड ट्री’ के संस्थापक डॉ. एन.एस.पार्थासारथी से रूबरू होने का मौक़ा मिला जिन्होंने यात्रियों को माइन्ड ट्री के इतिहास से रूबरू कराया । ‘माइन्ड ट्री’ की शुरूआत 1998 में हुई थी जो कि वर्तमान में 700 मिलियन डॉलर की संस्था बन चुकी है । यह भारत की 7 सफल आईटी सर्विस प्रोवाइडर कम्पनियों में से एक है । डॉ. पार्थासारथी कहते हैं कि उन्हें इन्सानों को रिसोर्स यानि स्त्रोत कहना बिल्कुल भी पसन्द नहीं था इसलिए उन्होंने इसे माइन्ड ट्री नाम दिया और वो अपने कर्मचारियों को ‘माइन्ड ट्रीज़ ट्री’ यानि बौद्धिक वृक्ष कहकर बुलाते हैं । माइन्ड ट्री का नामकरण तत्कालीन स्टार्टअप कम्पनी के नेम इट के द्वारा किया गया । डॉ. पार्थासार्थी बताते हैं कि किसी भी उद्यम या किसी भी उत्पाद की शुरूआत के लिए उसका नाम कितना महत्वपूर्ण होता है । वो पजेरो गाड़ी का उदाहरण देते हुये कहते हैं कि यूरोप में इस शब्द का अर्थ अच्छा नहीं है और इसे बहुत बुरा माना जाता है इसलिये इस गाड़ी को वहां विपरीत प्रतिक्रिया झेलनी पड़ी इसलिये किसी भी उद्यम, कम्पनी या उत्पाद का नाम वैश्विक रूप से स्वीकार किया जाने वाला होना चाहिये । डॉ. पार्थासारथी बताते हैं कि किसी भी संस्था के लिए लक्ष्य, उद्देश्य, मूल्य, आंतरिक संरचना (डीएनए) और उनका क्रियान्वयन अत्यन्त आवश्यक तत्व हैं ।

श्री श्री रविशंकर और डॉ. पार्थासारथी जैसे दो ऊर्जावान एवं प्रेरक व्यक्तित्वों (रोल-मॉडल्स) को सुनने के बाद दूसरे ही सत्र में ‘डिजिटल इंडिया’ विषय पर पैनल चर्चा हुई जिसके माध्यम से यात्रियों को डिजीटल उद्यमियों से रू-ब-रू होने का मौक़ा मिला ।

योर स्टोरी डॉट इन’ नाम से वेब पोर्टल चलाने वाली श्रद्धा शर्मा ने पैनल चर्चा की शुरूआत ‘फिश एण्ड फन’ नाम की प्रेरक कहानी सुनाते हुये की जिसके तहत उन्होंने युवाओं को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित और केन्द्रित रहने का सुझाव दिया । साथ ही इस चर्चा के दौरान युवाओं को हाऊसिंग डॉट कॉम के संस्थापक राहुल यादव, शैक्षिक क्षेत्र में काम करने वाली स्प्रिंग वर्ल्ड वेबसाइट की संस्थापक पारूल गुप्ता, पार्सल डॉट इन से क्षितिज और बिलाँग संस्था के संस्थापक विजय  जैसे युवा उद्यमियों के विचार और उनके वेन्चर की शुरूआत में आई समस्याओं और चुनौतियों से जूझने के उनके अनुभवों को सुना । इस तरह यात्रा का दूसरा पड़ाव बंगलौर यात्रियों को आध्यात्म,आईटी क्षेत्र और डिजिटल भारत से रू-ब-रू कराते हुए गुज़रा और अपने तत्कालीन घर जागृति रेल में लौटने के पश्चात् यात्रियों ने भिन्न समूहों में इन विषयों पर अपना विश्लेषण प्रस्तुत किया ।