अरविंद आई केयर, मदुरै – यात्रा का तीसरा पडाव

जागृति यात्रा की रेल, 28 दिसंबर, 2016 को मदुरै स्टेशन पहुँची । सुबह-सुबह ही अत्यंत मधुर आवाज़ मे सभी यात्रियों को जगा दिया गया । घोषणाएँ हुई, और सभी यात्री नाश्ते के बाद अपने अपने बसों मे ‘अरविंद आई केयर’ पहुँच गए । वहाँ जाने पर सभी जैसे पहली मंजिल की ओर बढ चले ।

बडे से हॉल के बाहर इस अस्पताल के संस्थापक – पद्मश्री “डॉ गोविंदप्पा वेंकटस्वामी” जिन्हें प्यार से ‘डॉ वी’ भी बुलाया जाता है का एक प्रेरक वक्तव्य लिखा था – ‘जब हमारे चित्त का आध्यात्मिक विकास होता है, तो हम विश्व मे सभी से संबंध बना पाते है, और साथ ही यह भी जानने लगते है कि दूसरों की सेवा मे हम स्वयं की ही सेवा कर रहे है‘ । यात्रियों ने जैसे जूते खोलते वक़्त इस पर चिंतन किया ।
अंदर बैठते ही कार्यक्रम शुरु । ‘सोशल अल्फा’ के नाम से एक संस्था के प्रतिनिधि ने बताया कि कैसे इस संस्था और जागृति यात्रा ने साझेदारी की है । ‘टाटा ट्रस्ट’ तो खैर एक विश्वसनीय संस्था है जो समाज मे बदलाव के लिए काफ़ी अरसों से काम कर रही है । ‘स्कूल ओफ़ सोशल एंटरप्रेन्योरशिप’ के भी प्रतिनिधि वहाँ मौजूद थे । सभी ‘नवीनता’ से बढ रहे ‘उद्यम के विकास के लिए सहयोग’ को प्रतिबद्ध थे । आप कोई भी शुरुआत करें : आपसे समान सोच, विचार और सुप्रभाव स्थापित करने वाले लोग तो जुडेंगे ही । जागृति यात्रा की पहल भी कोई अपवाद न रही ।

खैर किसी भी पहल के पीछे एक खास समस्या को हल करने का संकल्प होता है । उसी को ध्यान मे रखते हुए ‘अरविंद आई केयर’ के बारे मे छोटी सी प्रस्तुति देकर यात्रियों को अवगत कराया गया । बताया गया कि विश्व मे करीब साढे चार करोड लोग अंधे है । इनमे से 80 प्रतिशत को या तो टाला जा सकता है या इलाज से सही किया जा सकता है । ‘डॉ वी’ इसे अनावश्यक अंधापन मानते थे और इस संस्था का लक्ष्य भी ‘अनावश्यक अन्धेपन को दूर करना’ ही रखा गया । मोतियाबिंद की सर्जरी मे तो ज्यादा वक़्त भी नही लगता जो दृष्टि हीनता का मुख्य कारक है । उनकी संस्था अब प्रतिवर्ष 11 लाख मरीजों की मदद कर रही है जिनमे से दो लाख सर्जरी हर वर्ष की जाती है । सर्जरी की सफ़लता कई विकसित देशों से भी बेहतर है । पूरे विश्व मे आज इस संस्था पर ‘केस स्टडी’ की जा रही है । 150 से भी अधिक अस्पतालों को ये परामर्श देती है । पाँच अस्पतालों को खोल कर विस्तारण भी किया जा चुका है

ये सूचनाएँ यात्रियों को अभिभूत कर रहे थे । उनके रोमांच को और बढाते हुए एक चालीस मिनट की वीडियो भी दिखाई गई । किस प्रकार दृष्टिहीन हो जाने से एक किसान जिसपे पूरा परिवार भरन-पोषण के लिए निर्भर है – दुखी हो जाता है । किसी को दृष्टि वापिस मिल जाए इससे बडी सहायता और सशक्तिकरण क्या हो सकती है ? यात्रियों मे से कई इससे अत्यंत प्रेरित होकर एक दूसरी दृष्टि को जैसे पा रहे थे – ‘उद्यम से, पहल से बदलाव’ । ‘डॉ वी’ की जीवनी भी अत्यंत प्रेरक कारी रही । उन्होंने स्वयं एक जानलेवा बीमारी से संघर्ष किया और इस दौरान होने वाली पीडाओं ने उन्हें संवेदनशील बनाया । काफ़ी वर्षों तक कुशलतापूर्वक सरकारी चिकित्सीय तन्त्र मे कार्यरत होकर उन्होंने उत्कृष्ट सेवाएँ दी । 58 वर्ष की आयु मे उन्होने ‘अरविंद आई केयर की पहल की’, उसे ‘मैक्डोनल्ड्स’ की तर्ज पर विकसित किया ताकि ये अधिक से अधिक मरीजों की सेवा कम से कम मूल्य मे कर सके । उन्होंने लेंस की लागत 200 डॉलर से 10 डॉलर करने को स्वयं की ही ‘ऑरोलैब’ फ़ैक्ट्री लगाई । बुद्धिमत्ता एवं क्षमता होना ही काफ़ी नही है, कुछ खूबसूरत बदलाव लाने की खुशी भी अनुभव होनी चाहिए ।

‘डॉ अरविंद’ ने सभी यात्रियों को संबोधित किया । उन्होने कहा की ‘मीनाक्षी मंदिर’ करीबन हजार वर्षों से विद्यमान है क्योंकि इसके निर्माण मे दो सौ वर्ष लगे । इसी प्रकार नतीजों को पाने के लिए अधीरता नही बल्कि प्रयत्न और धैर्य की जरूरत है । काफ़ी ईमानदारी से सोचे की कौन सी समस्या आपको सोने नही दे रही । और अगर ऐसी कोई बात है तो पहल रंग लाएगी । ‘डॉ वी’ का ही उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया की उन्होने 58 वर्ष की आयु मे इस संस्था की नींव रखी | आप समय ले सकते है, बस खुद के प्रति ईमानदार बने रहिए । एक मैराथन दौडनी है … और इसके लिए अपने दिल और दिमाग को संतुलित रखते हुए बस चलते ही जाइए ।


अब ये समय उपयुक्त हो चला था कि खुद ‘डॉ अरविंद’ और ‘श्री आर डी तुलसीराज’ यात्रियों के प्रश्नों का जवाब दे । ‘श्री आर डी तुलसीराज’ के परिचय को उनका यह ‘टेड वीडियो’ ही पर्याप्त है ।

https://www.ted.com/talks/thulasiraj_ravilla_how_low_cost_eye_care_can_be_world_class

संस्था मे शुरुआती निवेश, कार्यकारी खाका, और मुफ़्त मे या कम दामों मे सुविधाएँ प्रदान करना कैसे संभव है, यह उन्होंने पूछा । उन्होने उत्तर दिया की इसके लिए ‘बाजार को समझना, सेवाएँ और उत्पादों मे दक्षता, एवं सही नेतृत्व क्षमता वाले लोगों को एक सुप्रबंधित व्यवस्था से जोडना’ आवश्यक है । उन्होंने बताया की एक सुचारु अस्पताल के निर्माण मे तीन से पाँच वर्ष लग जाते है । वो भारत के आठ प्रतिशत दृष्टि रोगियों की सेवा कर पा रहे है और अगर कोई यात्री अपने जिले मे छोटे स्तर पर ही पहल करें तो काफ़ी अच्छा होगा । उनके प्रशिक्षण के तरीके, तेज सुविधाएँ देने के साधन, ये सभी यात्रियों के लिए भी तो एक ‘केस स्टडी’ ही था । ‘डॉ अरविंद’ ने यात्रियों को ‘मास्टरी’ शीर्षक की किताब पढने को कहा जिसके लेखक ‘रोबर्ट ग्रीन’ है ।

 

और फिर क्या था, इतने मानसिक मंथन के बाद कुछ शारीरिक ऊर्जा का भी तो प्रयोग हो । ‘यारो चलो’ – प्रसून जोशी द्वारा रचित गीत पर सभी झूम उठे । अब तक तो सभी यात्रियों को इस गीत पर किस प्रकार नृत्य करना है – याद हो चुका था ।

एक पूर्ववर्ती यात्री ने भी ‘अरविंद आई केयर’ पर एक शानदार वीडियो बनाया है । ‘श्री आशुतोष कुमार’, जो जागृति के कार्यकारी निदेशक है, ने इस वीडियो को औपचारिक रूप से युट्युब पर ‘पब्लिक’ किया ।

https://www.youtube.com/watch?v=Wfsrg7aait8

मदुरै आए यात्रियों ने ‘एंगा मदुरै’ गाने पर भी नृत्य किया, जिसे ‘श्री सनिल जोसेफ’ ने गाया ।

https://www.youtube.com/watch?v=kQyRH40ZFPo

‘जागृति यात्रा’ हर वर्ष ‘अरविंद आई केयर’ आती है और इसी का परिणाम है की एक पूर्ववर्ती यात्री ‘श्री राहुल कोप्पुला’ ने इससे प्रेरित होकर ‘लेंसफ़िट” नाम से एक नवीन उद्यम की शुरुआत की है । यह एक ‘ई कामर्स वेबसाइट है जो चश्मों के साथ नवीन डिजाइनों को जोड रही है । उन्होने इसके लिए ज़रूरी डेढ करोड रुपए का निवेश भी जुटा लिया है । वह भविष्य मे इन उत्पादों को ‘आफ़लाइन स्टोर्स की श्रृंखला’ बनाकर भी उपलब्ध कराएँगे’ ।

इस यात्रा मे ‘मधु’ एवं “हाज़्ररा’, ये दो कलाकार पश्चिम बंगाल से आए है और ये एक अनोखी कला जिसका नाम ‘पट्ट चित्रकारी’ है से हर पडाव के अनुभवों को अपनी कला से प्रस्तुत करते है । साथ ही बडी ही मीठी ‘बंगाली’ भाषा मे गाकर ये इन चित्रों का वर्णन यात्रियों से करते है । मदुरै मे यात्रियों ने तालियों की गड्गडाहट के साथ इन दोनों कलकारों को सम्मान दिया एवं उनसे अपनी कला एवं संस्कृति को जीवंत रखने की सीख भी पाई ।

इसके बाद तो एक अस्पताल के भीतर शायद ही किसी यात्री ने ऐसे स्वादिष्ट भोजन को चखा होगा । यात्रा का यह भी तो लाभ है – पूरे भारत के प्रसिद्ध क्षेत्रीय व्यंजनों से पेटपूजा ।

भोजन के पश्चात, यात्रियों ने ‘ऑरोलैब’, ‘नित्य्ता’, ‘मुफ़्त और समूल्य’ अस्पतालों को अपने अपने समूहों मे देखा । मदुरै मे तो लोग ‘मीनाक्षी मंदिर’ देखने को आते है, पर इन यात्रियों ने समय कम होने के कारण वहाँ न जाकर इस अस्पताल को ही मंदिर समझा । इसके प्रत्यक्ष कार्यों को देखा, अस्पताल के कर्मचारियों से बात चीत की जिसका अन्य कोई विकल्प नही है । यह यात्रा एक अनुभव ही तो है । और अनुभव से मिले ज्ञान का महत्व अलग ही होता है । इन्हीं विशेष अनुभवों को दिल मे सहेजे सभी यात्री वापस बस से स्टेशन रवाना हुए । मदुरै मे उन्हें कुछ खास मिला था । न जाने कितने लोगों को यह अनुभव सुप्रभावित कर पाए – एक दृष्टि दे पाए इसी संतोष के साथ रेल अगले पडाव को चल पडी – ‘श्री सिटी’

जागृति एंटरप्राइज़ मेला (जे. ई. एम.), बेंगलुरु

जागृति यात्रा 27 दिसंबर, 2016 को बेंगलुरु शहर पहुँची । यहाँ माउंट कारमेल कॉलेज के सभागार मे 500 युवा उद्यमी यात्रियों के साथ दो आदर्शों ने अपनी उद्यम यात्रा को साझा किया एवं उनके प्रश्नों का जवाब दिया । ये दोनों आदर्श सामाजिक पहलों से सुप्रभाव स्थापित करने मे सफ़ल रहे है । ‘श्रीमती हेमलता अन्नमलाई’ एवं ‘श्री ओसामा मंज़र’ ने बिल्कुल ही निराले अन्दाज़ों मे अपनी कहानियों को साझा किया । हेमलता जी ने ‘दृढ संकल्प के साथ कडी मेहनत,कभी हार न मानने की शक्ति को उद्यम के लिए काफ़ी ज़रूरी बताया । शायद इसी की वजह से उनके ‘एंपीयर’ नाम की संस्था ने ग्रामीण महिलाओं को विद्युत चालित वाहनों को सस्ते दामों मे उपलब्ध करा कर एक स्थिर संस्था का निर्माण किया है । उन्होने ‘योग’ के जरिए युवाओं को स्वस्थ रहने का संदेश दिया, तथा अनुशासित जीवन से भारत मे तकनीक के द्वारा आम आदमी के जीवन मे बदलाव लाने की प्रेरणा दी । महिलाओं को उन्होने एक बेहतर उद्यमी बताया अगर वो अपनी निर्णय शक्ति को आज़ाद रख सके तो ।

‘डिजिटल एम्पावर्मेंट फ़ाउंडेशन’ के ओसामा मंज़र ने पंचायतों एवं सामाजिक संस्थाओं को सूचना क्रांति से जोडने की ज़रूरत बताई । उन्होने अपनी रोचक जीवनी से एक उद्यमी के जोखिम लेने की प्रवृत्ति के कई उदाहरण बताए । साथ ही उन्होने अपनी संस्कृति, विरासत, भाषा, ज्ञान और जो पिरामिड के आधार मे रहने वाले लोग है उनका आदर करने की प्रेरणा दी ।

दोनों आदर्शों से मुलाकात के बाद यात्रियों ने ‘जागृति एंटर प्राइज मेला’ मे भाग लेने वाले नवीन उद्यमियों की प्रदर्शनियों को देखा । मेला इन कार्यक्षेत्रों से संबंधित रहा –

कृषि
शिक्षा
ऊर्जा
स्वास्थ्य
विनिर्माण
जल और स्वच्छता
कला, संस्कृति एवं खेल
प्रोद्योगिकी, वित्त एवं व्यापार सेवाएँ

करीबन पचास नवीन उद्यमों ने इस मेले मे प्रदर्शनी लगाई ।

मेले मे ही ‘संकल्प सामाजिक विकास संस्था’ ने ‘बोर वेल रिचार्ज’ के क्षेत्र मे अपने कार्यों की प्रदर्शनी लगाई । इसके संस्थापक ‘ श्री सिकंदर मीरानायक’ ने अपने गाँव ‘कोटुमचगी, कर्नाटक’ मे पानी की कमी की समस्या को देखते हुए 2008 मे ही इस संस्थान की शुरुआत की । उन्होने बताया कि किसानों को किफ़ायती तरीके से जल की उप्लब्धता कराने मे उन्हें काफ़ी हर्ष की अनुभूति होती है । एक नया ‘बोर वेल’ बनाने मे पानी की किल्लत के साथ साथ खर्च भी अधिक होता है ।

इसी प्रकार ‘लेट्स एन्डोर्स’ ने कई सामाजिक सन्स्थाओं को एक डिजिटल मंच दिया है जिससे वो अपने कार्यों के सुप्रभाव का सफ़ल प्रदर्शन कर ज़रूरी सन्साधनों को पाने के लिए इस मंच पर सहयोगियों से मदद पा सकते है ।

‘बज्ज इंडिया’ नाम की सामाजिक संस्था गाँवों मे एक प्रशिक्षण बस चलाती है, जिसके द्वारा वो महिलाओं के जीवन मे काफ़ी परिवर्तन ला पाई है । उन्हें वित्तीय अव्यवस्था, व्यापार के हुनरों मे कमी, सूचना के अभाव जैसे समस्याओं का सामना करना पडता था- पर ‘बज्ज इंडिया’ ने जागरुकता एवं प्रशिक्षण अभियानों से काफ़ी हद तक इन्हें दूर किया है ।

‘डेली डंप’ की संस्थापिका ने कचडे को ‘डिजाइन थिंकिंग’ से मूल्यवान बनाया, साथ ही कहा की कुछ क्षेत्रों मे समय और समर्पण से ही आप कुछ हासिल कर पाते है ।

कुछ और नवीन उद्यम जिन्होने मेले मे ‘वर्चुअल रीएल्टी’ से लेकर ‘शौच स्वछ्ता’ तक समस्याओं और नवीन समाधानों के हर बिंदु को छुआ । साथ ही श्नाइडर एलेक्ट्रिक, एंपीयर एवं डिजिटल एम्पावर्मेंट फ़ाउंडेशन’ की प्रदर्शनियां तो थी ही ।

इस मेले से यात्रियों को कई नवीन विचारों और उनके सफ़ल क्रियान्वयन का एक जीवंत खाका मिला है । उनके सपने, विचारों और ऊर्जा भरे ख्यालों को अंत मे ‘योर्स ट्रूली थिएटर्स’ ने एक छोटे से कार्यक्रम की प्रस्तुति कर और जवां कर दिया ।

यात्री गीत पर झूमते हुए सभी यात्री ‘उद्यम से भारत निर्माण” के संदेश को अगले पडाव पर ले जाने के लिए पुनः रेल की यात्रा को रवाना हुए ।

 

जागृति यात्रा प्रस्तुत करता है – बिज़ ज्ञान ट्री

बिना प्रतिस्पर्धा के उद्यमी होने का क्या ही मज़ा ? उद्यमी तो हमेशा उस अंतिम मील का लक्ष्य पाने के लिए प्रोत्साहित कदमों के साथ बढ़ता ही जाता है | उसकी प्रेरणा का स्रोत हमें अक्सर दिखाई नही दे पाता |
 
अगर ऐसा है तो फिर एक उद्यमी यात्रा जिसमे ५०० से भी अधिक ऊर्जा से परिपूर्ण युवा उद्यमी या भावी उद्यमी एक रेल मे सफ़र कर रहें हों तो माहौल अपने आप ही प्रतिस्पर्धा से भर जाता है |
 
 बी. जी. टी. एक कार्यशाला जैसे  प्रतिस्पर्धा भरे माहौल मे प्रतिभागियों के लिए ग्रामीण परिवेश मे स्थानीय लोगों से विचार-विमर्श करवाती है | इसमे स्थानीय विशेषग्यो की सहभागिता से यात्री उनके सामाजिक एवं व्यापारिक ज़रूरतों को समझ पाते हैं | तत्पश्चात् संबंधित प्रतिभागी सात कार्यक्षेत्रों मे जिनमे – 
 
कृषि 
शिक्षा
ऊर्जा
स्वास्थ्य
जल
विनिर्माण, और 
कला 
 
आते हैं, व्यापार योजना बनाते हैं एवं विचारों का सृजन और मंथन करते है | ये सात कार्यक्षत्र के तीन आयामों – जिनमे वित्त, मोबाइल और सूचना प्रौद्योगिकी तथा सरकारी निजी कंपनी भागीदारी आते हैं – इन पर प्रमुखता से ध्यान दिया जाता है |
 
बी. जी. टी. की प्रक्रिया दो चरणों मे पूरी की जाती है |
 
– रेल मे यात्रा के दौरान
– यात्रा के पश्चात निवासीय कार्यक्रम 
 
छह से सात लोगों का एक दल तकनीक और वित्तीय दृष्टि से व्यापार-योजना पर मंथन करते है |
 
रेल मे ऐसे सभी दल अपनी-अपनी योजनाओं की प्रस्तुति करते है | ऐसा बरपार, देवरिया के पड़ाव पर संभव हो पाता है क्यूंकी वहाँ पर इस प्रक्रिया के लिए समुचित संसाधन उपलब्ध कराए जाते है | (इन संसाधनों को जान बूझकर सीमित रखा जाता है ताकि यात्री संसाधन की बचत और उनके अधिकांश प्रयोग
 के तरीकों को समझ सकें ) | व्यापार की रणनीति को हर दृष्टिकोण से माप लिया जाता है |
 
हर योजना की उत्कृष्ता का आकलन किया जाता है और जो भी श्रेष्ठतम हैं उन्हें दूसरे चरण के लिए चुना जाता है | देवरिया मे इन विजेताओं को योजनाओं के कार्यान्वयन मे सहयता प्रदान की जाती है | 
 
२०१७ की यात्रा मे तो इस कार्यशाला का सभी को बेसब्री से इंतज़ार है | 

जागृति यात्रा: उद्घाटन समारोह, मुंबई

जागृति यात्रा का उद्घाटन समारोह कल ‘टी आई एस एस’ के सभागार मे सम्पन्न हुआ । इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप मे ‘श्री किशोर माध्यन’ उपस्तिथ थे । उन्होने सभी यात्रियों को जीवंत उदाहरणों से निरंतर सीखते रहने का संदेश दिया ।  साथ ही पुस्तकों के अध्ययन पर उन्होने खासा जोड दिया । उन्होनें कहा की यात्रा की लंबी अवधि के दौरान सीखने के लिए ये ज़रूरी है की यात्री पूर्वाग्रहों का त्याग कर नए अनुभवों के लिए तैयार रहें ।  
 
                                                                              उद्घाटन समारोह, मुंबई
 आदरणीय रेल मन्त्री ‘श्री सुरेश प्रभु‘ ने वीडियो के ज़रिए सभी युवा यात्रियों को ‘डिजिटल भारत’ से सकरात्मक बदलाव लाने के लिए नवीन उद्यम लगाने का सन्देश दिया ।
 जागृति के अध्यक्ष ‘श्री शशांक मणि त्रिपाठी‘ ने अगले बीस वर्षों मे ‘उद्यम से भारत निर्माण’ के लक्ष्य मे  मध्य भारत के युवाओं के ऊर्जा को दिशा देने की तात्कालिकता का एह्सास कराया |
 
इस अवसर पर कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ | ‘जागृति गीत’ पर प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना ‘गौरी शर्मा त्रिपाठी‘ ने सभी युवाओं को झूमाया | 
 
‘जागृति एंटरप्राइज सेंटर – पूर्वांचल‘ के प्रतिकृति का अनावरण भी किया गया जिसे तृप्ति दोशी ने एक दो सौ वर्ष पूराने बरगद के पेड के चारों ओर डिजाइन किया है । 
 
इस केन्द्र मे ही इन्क्युबेटेड ‘देवरिया डिजाइन्स’ की कहानी को ‘पूजा शाही’ और ‘प्रीति’ ने साझा किया | पूजा ने बताया की ‘ज़ागृति ने किस प्रकार ‘देवरिया’ जैसे जिले मे उनके हुनर को पह्चाना, उन्हें सही मार्ग दर्शकों से जोडा जिसके परिणाम स्वरूप उनकी हस्त शिल्प  को दुबई शहर के  प्रदर्शनियों मे स्थान मिल सका । उन्हें विश्वास है कि आने वाला केन्द्र उनके जैसी ग्रामीण परिवेश से आने वाली कई पूजाओं के सपनों को पूरा करेगा ।
 
जागृति यात्रा सम्पूर्ण भारत का परिभ्रमण करेगी, साथ ही उद्यम से भारत निर्माण के लक्ष्य मे यह सभी पडावों से मिट्टी के कणों को लेकर, आने वाले केन्द्र की आधार शिला बनाएगी | 
श्नाइडर एलेक्ट्रिक‘, जो जागृति यात्रा 2016 के मुख्य सहायक है की ओर से अनामिका भार्गव ने भी युवाओं को ऊर्जा के क्षेत्र मे सामाजिक पहल करने की प्रेरणा दी |

जागृति यात्रा: लाइफ़ लाइन एक्सर्साइज

जागृति यात्रा के पहले ही दिन – यात्रियों को एक अनोखी प्रक्रिया से गुजारा गया । इसका नाम ‘लाइफ़ लाइन एक्सर्साइज’ है जो अभी भी जारी है । इसके तहत सभी यात्री अलग-अलग समूहों मे अपने जीवन के अब तक के सभी अनुभवों को सन्क्षिप्त और कभी-कभी विस्तार मे अन्य यात्रियों से साझा करते है । जैसे – जैसे वो अपने जीवन के घटनाओं का वर्णन करते है, वैसे – वैसे ही वो अपनी जीवन रेखा के उतार-चढावों को रेखांकित कर प्रत्यक्ष रोमांच कायम रखते है |

इस प्रक्रिया मे कई यात्री एक दूसरे से घुल-मिल कर एक- दूसरे के प्रति समझ विकसित कर पाते है । उदाहरण-स्वरूप, एक यात्री ने अपने जीवन के उस वक्त का वर्णन किया जब वो अपने जीवन को ही समाप्त करने की सोच पडे थे । खैर, उन्होने ऐसा नही किया और उसके बाद ही उनका चयन ‘वर्ल्ड इकोनोमिक फ़ोरम’ मे हुआ । इससे श्रोता यात्रियों मे कभी हार न मानने के महत्व को समझा ।

एक और युवती ने बताया कि कैसे उन्होने पहली बार अकेले यात्रा की है क्योंकि उनके माता-पिता ने उन्हें लडकी होने के कारण काफ़ी बंदिशों के माहौल मे रखा |फिर भी यात्रा के इस अवसर के लिए उन्होने खुद के निर्णय को सर्वोपरि रखा । उन्होने बताया की उन्हें साहित्य मे रुचि थी, किन्तु फिर भी अन्य लोगों के नज़रिये से प्रभावित हो कर उन्होने ‘वाणिज्य’ की पढाई की| उन्होने काफ़ी खुलकर कुछ शारीरिक रोगों के अनुभवों को भी साझा किया |

ऐसी शिक्षा शायद ही कही मिल पाएं जो यात्रियों को इन वास्तविक जीवन की सच्चाइयों से अनुभव कराता है । साथ ही इस प्रक्रिया ने सभी यात्रियों को विनम्र होने का एक मौका दिया है, क्योंकि बहुत सारे यात्रियों की ज़ीवनी काफ़ी प्रेरित करने वाली रही है । कुछ ने तो सफ़ल उद्यमों की स्थापना कर डाली है और कईयों ने सफ़ल आरामदायक जीवन का परित्याग कर छोटे स्तर पर ही सामजिक पहल कर अन्य लोगों के जीवन की समस्याओं को दूर करने की ठानी है ।

पूरे भारत से, सभी राज्यों से एवं 23 अन्य देशों से आए यात्री न जाने कितने अलग-अलग भाषाओं, कहानियों को साझा कर रहे है | रेल अभी भी भारत के खेतों, पठारों से होकर गुजर रही है | काफ़ी रोमांचक अनुभव है | यात्रा जारी है …

This architect from IIT-KGP helps make fun play areas for kids out of used tyres!

But wait. Listen, watch, enjoy. Let them play. And just be ready to help them take their next step. Don’t interrupt. Don’t insert yourself into their game without invitation. Please don’t say ‘oh what are you playing here?’ and totally disrupt a lovely moment. #bringbackplay

Pooja Rai, an architect from IIT-KGP quit her job as a product manager with Stayzilla to follow her passion of creating innovative, sustainable solutions using her technical background in architecture.

She, along with four other batchmates, started Anthill Creations, with the vision to mobilize communities by creating low-cost, sustainable play spaces from recycled tires & scrap. They transform spaces into creative areas for children. These play spaces are created for children of all age-groups, with a specific focus on early childhood learning.

Anthill created the first low-cost playground made of old tyres at the IIT Kharagpur campus. This was at the Disha Seema care centre in IIT Kharagpur, West Bengal. They built this playground for underprivileged kids & received assistance from Michelin tyres & college alumni. Contributions from batch mates and juniors made this DIY project a huge success.

“While in college, I worked closely with Disha Seema Center, which was a residential care centre for underprivileged children from surrounding villages.

There was always a dearth of resources, and while the Center was committed to delivering education to these children, my friends Nupur and Paul and I often discussed the lack of play space.

Luckily for us, during his internship, Paul had discovered the wonders of using upcycled tyres for construction during his internship. Our thoughts converged into a single solution — why not make a recycled tyre playground? It was totally D-I-Y, low-cost and a fun way to bring smiles into the lives of these children.”

 

AAO Hostels

Love travelling but on a low budget, then choose a Backpacker’s Hostel. One such Hostel was set up by our yatris, and had named it AAO HOSTELS.

Mahendra Pyati
Founder, AAO Hostels

Mahendra Pyati, Yatri 2009 along with his friend Saurabh Jain, Yatri 2011 piloted this idea in Nashik for a month and formally launched in Bangalore in 2015 as a private limited company. Pyati, who is a traveler by passion, has felt the dearth of such shared accommodation in India. He observes that such hostels are very few in number in India unlike 50-60 such hostels in a European city. “The idea to start up was there since some time, but it got kick started when I was travelling in the Yatra”, says Pyati, who is an IT professional as well. He adds, numerous discussions in the Yatra have also helped him.

It offers decent accommodation (20-bed) with a host of services and helps travelers have cultural exchange too. On an average, about 400 people visit this centrally located hostel in Koramangala, Bangalore every month. Set up with a limited budget, AAO Hostel’s journey has been smooth and registered profit in its first year. It has won funding from the Karnataka Government’s Idea2POC fund in a hackathon titled ‘Pitch to the Government’ in September 2016. This would enable them to scale up. They are currently building up an e-commerce platform for such hostels in India. Pyati says that they are willing to help others to set up their own hostel ventures and are also working with the Karnataka Government in bringing up a policy for Hostels.

The next time you visit Bangalore, don’t miss to check in AAO HOSTELS as it’s an ideal place for Budget, solo travelers, and Backpackers! Travel More, Stay in Hostels More.

RAW DREAMS

Alysha Tharani
Founder, Raw Dreams

“If you dare to dream and go against all odds, then get RAWed”, says Alysha Tharani, the youngster who set up Raw Dreams Consultancy.

With an aim to encourage different aspirations of individuals, be it education, or career. With the help of Leadership Consultancy guides or mentors, Raw Dreams facilitates young minds of 13-28 year old into making informed potential investments in their careers. She wants to solve the mismatch between market demand and supply of skilled, innovative and futuristic human resources.

Alysha Tharani shares, “One of the aspirants was interested in becoming an astronaut, Raw Dreams guided him to participate in a competition that paved his path to Mecca of astronauts. Because of his exemplary performance, he was invited to NASA to meet all the existing and aspiring scientists. He definitely has better clarity and direction to pursue his goal now. For those who are not very clear about their career options, we guide them based on their interests.”

Rawdreams

As a young girl, Alysha was fascinated by animals and studied BiPC(Biology, Physics and Chemistry) in plus2 and graduated with a liberal arts degree. Later on, she worked with business consulting firms and founded an Event Management company. She pursued Future India Fellowship and travelled in Jagriti Yatra 2009. What she studied was completely different from what she was aspiring to do. She realised that as a child, she had no clear guidance or awareness to follow her heart and found the same dearth for guidance for students even today. Alysha says Jagriti Yatra made her less hesitant and gave access to a wonderful network. All of these experiences led to the birth of her venture in 2014.

With its base in Hyderabad, Raw Dreams has extended its operations to Chattisgarh and Maharashtra and reached over 4000 people till date. If it was her innovative idea that gave a challenge in the initial phase, the current challenge is to build the network of mentors and to let this human intensive organisation expand.

Rawdreams can be reached out at:-

Website – therawdreams.com

Facebook Page – https://www.facebook.com/GetRAWed/

Melange of inspiration, enlightenment and empowerment

The eighth edition of Jagriti Yatra is reaching towards its conclusion. However, the eleventh destination for role model visit includes a combination of takeaways for the yatris. Barefoot College in Tilonia, Rajasthan, needs no introduction, and Bunker Roy, the individual behind this innovative and successful business model, has been acclaimed as one of the most influential personalities in the world.

Changing the rural world is no easy task. A study on Bunker Roy and Barefoot College reveals how a person of unique vision can transform the lives of thousands in a village. It is indeed an incredible example of how a person’s dream can make people belonging to rural communities self-sufficient and sustainable. Apart from it, the mission of Barefoot College lies in the belief that empowering women opens door to sustainable development, and that makes it exceptional for last 40 years of functioning in this shady area of Rajasthan.

To realise the impact of Barefoot College, one should pay a visit to Tilonia, and that is why yatris find this day as gifted one. They got the opportunity to visit schools, manufacturing units etc in the village apart from interacting with teachers, students, volunteers during the morning session in Tilonia. Afternoon, yatris had an interactive session with Bunker Roy, in which he shared a few gems of inspiration.

बिज़ ज्ञान ट्री – सम्मान समारोह

5 जनवरी 2016, दिल्ली – कमानी ऑडिटोरियम

दिल्ली का कमानी ऑडिटोरियम 5 दिसम्बर को  उस पल का साक्षी बना जिसका इंतज़ार सभी यात्रियों को इस 15 दिन की यात्रा के दौरान बेसब्री से रहा । मौक़ा था 3 दिसम्बर को देवरिया, उत्तर-प्रदेश में हुई बिज़ ज्ञान ट्री की प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित करने का । इस मौक़े पर सर्टिफिकेट देकर विजेताओं को सम्मानित किया गया ।

कार्यक्रम की शुरूआत जयन्त सिन्हा, (राज्य मंत्री वित्त)  एवं प्रकाश जवाड़ेकर (मंत्री पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन) द्वारा यात्रियों को सम्बोधित करने से हुई ।  बिज़ ज्ञान ट्री प्रतियोगिता के प्रशस्ति-पत्र (सर्टिफिकेट) वितरण में मुख्य अतिथि के तौर पर पुंज लॉयड संस्था के संस्थापक जे. पी. चलसानी जी उपस्थित रहे ।

कर्नल भाया, डोमिनो (वाऊ संस्था) द्वारा विजयी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र वितरित किये गये । विजयी प्रतिभागी इस प्रकार रहे-

टीम ‘आईरा’ (AIRA) को  कृषि एवं कृषि व्यवसाय आयाम के लिए, टीम ‘बूंद’ को  जल एवं स्वच्छता आयाम, टीम  ‘बंज़ाराज़ फुटवियर’ को  विनिर्माण आयाम( मैन्युफैक्चरिंग), शिक्षा एवं ज्ञान आयाम के क्षेत्र में ‘कुशल’, ‘स्किल मिल’ एवं ‘विलसिटी’, कला-संस्कृति एवं खेल के क्षेत्र में ‘दिति’, स्वास्थ्य आयाम के लिए ‘हेल्थहब’  को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया।

सबसे अधिक रचनात्मक विचार के लिए  ‘बूंद’ , सबसे अधिक इनक्लूसिव विचार जिसमें सभी ज़रूरी तत्वों का समावेश था, इसके लिए ‘मित्रा’, सबसे अधिक सहजता से प्रत्यारोपित किये जा सकने वाले विचार के लिए मोस्ट रेप्लिकेबल पुरस्कार से बंज़ाराज़ फुटवियर और सबसे अधिक संभावित विचार (मोस्ट फ़ीज़ेबल आईडिया) के लिए पुनः टीम आईरा को सम्मानित किया गया ।

इसके अतिरिक्त बीस वर्षों से व्यवसायिक क्षेत्र से जुड़े प्रेरक व्यक्तित्व शिव खेमका ने यात्रियों को नेतृत्व क्षमता के विषय में सम्बोधित किया और पाँच प्रतिभागियों को नेतृत्व क्षमता के लिए  खेमका अवार्ड तथा नक़द पुरस्कार से नवाज़ा गया ।

पूर्व यात्री तृप्ति दोषी द्वारा देवरिया में विकसित किये जा रहे जागृति एन्टरप्राइस सेन्टर के आर्टिक्चर पर प्रेसेन्टेशन दिया गया । तृप्ति को आर्किटेक्चर डिज़ाइन करने की ये कला विरासत में मिली है । उनके दादा जी के भाई ने अपने समय में राजघाट का आर्किटेक्चर डिज़ाइन किया था ।

पैनल चर्चा में उद्यमिता के उत्सव विषय पर बोलते हुये 3 पूर्व यात्रियों  रॉबिन चौरसिया (क्रान्ति), सुप्रिया (माई पार्लियामेन्ट) और गुणवन्त (शिक्षालय) यात्रियों से रू-ब-रू हुये । रॉबिन क्रान्ति संस्था के माध्यम से सेक्स वर्कर्स के बच्चों और मानव तस्करी के शिकार बच्चों पर काम कर रही हैं और उन्हें सशक्त बनाकर समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं । उनके अनुभवों को सुनकर सभी यात्री स्तब्ध रह गये ।

साथ ही इस पैनल चर्चा का समन्वय जागृति की बोर्ड सदस्य रेवती प्रभु द्वारा किया गया । रेवती ने दिल्ली से इस यात्रा में शामिल होते हुये सभी यात्रियों का स्वागत किया और उनसे मिल के ख़ुशी जताई ।